पंजाब में धान की पराली के निपटान की बड़ी समस्या के हल के लिए पंजाब और दिल्ली सरकार साझी पहले करने जा रही है। पराली के प्रबंधन के लिए पंजाब और दिल्ली सरकार ने राज्य में पूसा बायो डी कंपोजर का 5,000 एकड़ में पायलट प्रोजेक्ट लगाने का फैसला लिया है। इस विधि द्वारा पराली छिड़काव के बाद बिना जलाए खेत में मिट्टी में मिला दी जाती है।
पंजाब के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने प्रेस को जारी बयान में बताया कि इसको लेकर बीते बुधवार को देर रात नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक की गई। वह पराली से होने वाले प्रदूषण को रोकने और इसके प्रबंधन के लिए नईं दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिले। उन्होंने इस मामले में पूर्ण मदद का भरोसा दिया। इसके बाद इस मसले को लेकर दिल्ली के कृषि मंत्री गोपाल राय से भी मुलाकात की। यह प्रोजेक्ट दोनों राज्यों की सरकार की तरफ से मिल कर पंजाब में लगाया जाएगा।
कुलदीप धालीवाल ने कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से धान की पराली से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए पूरी तैयारियां कर ली गई हैं। इसके अंतर्गत जागरूक टीमें, चौकसी टीमों की प्रचार मुहिम और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी मुहैया करवाना शामिल है। बैठक में केंद्र सरकार की तरफ से किसान विरोधी रुख की भी निंदा की गई, जिसमें पराली के प्रबंधन के लिए पंजाब के किसानों को मुआवजे या वित्तीय सहायता करने की मांग को ठुकराया गया है। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि सरवजीत सिंह, डॉ. लवलीन शुक्ला, डॉ. सुनील पाबी, डॉ. के अन्नापूर्णा और विवेक कुमार त्रिपाठी भी उपस्थित रहे।