पद्मभूषण अवार्डी पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी पी गोपीचंद ने कहा कि देश में कोचों को उतना महत्व नहीं दिया जा रहा है जितना मिलना चाहिए। कोचों पर फेडरेशनों, एसोसिएशनों और सरकार का भी दवाब रहता है। वहीं बिना कोच की गाइडेंस के किसी भी खेल में मेडल नहीं आ सकते हैं।
वह सोमवार को नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) में साई की ओर से आयोजित इंटरनेशनल कांकलेव फॉर कोचिंग फ्रेमवर्क के समापन पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जो मेहनती और अपने काम के प्रति निष्ठावान कोच हैं उन्हें आदर-सत्कार के साथ-साथ उनकी प्रष्तिठा के मुताबिक काम भी मिलना चाहिए।
कोचों को सम्मान मिलने व महत्व देने से ही देश के खिलाड़ियों का विकास हो सकेगा। उन्होंने बताया कि इस कांकलेव के आयोजन का मकसद अंतरराष्ट्रीय कोचिंग के स्तर का भारतीय खेल कोचिंग फ्रेमवर्क बनाना है। इसके लिए कांकलेव के दौरान भारतीय स्पोर्ट्स कोचिंग सिस्टम, कोचों की क्वालीफिकेशन और डेवलपमेंट फ्रेमवर्क का जायजा लिया गया।
एनआईएस में वालीबाल ट्रेनिंग हॉल का उद्घाटन
एनआईएस में सोमवार को पांच करोड़ की लागत से बने वालीबाल ट्रेनिंग हाल का उद्घाटन किया गया। यह रस्म स्पोर्ट्स अथारिटी आफ इंडिया (साई) के डायरेक्टर जनरल इनजेती श्रीनिवास ने अदा की। उन्होंने बताया कि इस हाल को एसी करने पर भी विचार किया जा रहा है। हाल के निर्माण से खिलाड़ियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।