हरियाणा के 152 गांवों की 258 ढाणियों में पीने के पानी को लेकर जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री ने बेहद सनसनीखेज खुलासा किया गया है। इसके मुताबिक, यहां निवास करने वाले लाखों लोग फ्लोराइड और आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर हैं।
यहां वर्षों से ट्यूबवेल के पानी के जरिये प्यास बुझा रहे लाखों लोग पानी में रसायनों की मौजूदगी का अहसास बीमारियों के तौर पर कर रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब खुद केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ जल मुहैया कराने की योजना के तहत प्रदेश के ऐसे तमाम गांवों में साल के आखिरी तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं।
अगर हालात काबू नहीं हुए तो वह दिन दूर नहीं, जब 152 गांवों की इन ढाणियों में बीमार लोगों की संख्या और बढ़ेगी। फ्लोराइड युक्त पानी के मामले में पलवल और महेंद्रगढ़ प्रमुख हैं। जबकि आर्सेनिक की मात्रा गोहाना से लिए गए दो और हिसार से लिए गए छह सैंपलों में मानकों से काफी अधिक पाए गए हैं।
पिछले सप्ताह दिल्ली में ग्रामीण स्वच्छता एवं पेयजल योजनाओं की समीक्षा बैठक में जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री घनश्याम सर्राफ ने कहा था कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल के 9059 स्रोतों में फ्लोराइड और 3710 स्रोतों में आर्सेनिक की जांच की गई। इनमें 508 स्रोत फ्लोराइड और 10 स्रोत आर्सेनिक से प्रभावित पाए गए हैं। उन्होंने कहा था कि फ्लोराइड और आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
विभाग के चीफ इंजीनियर सुजाना राम के मुताबिक 508 में से 250 ढाणियों में ट्यूबवेल की बजाय नहरी पानी की आपूर्ति की जा रही है, ताकि लोगों को स्वच्छ जल मिल सके। वर्ष 2016 के अंत तक प्रदेश के शेष 258 ढाणियों में होले पानी की आपूर्ति में फ्लोराइड की मात्रा मानक के मुताबिक कर लिया जाएगा। इसके लिए कम्यूनिटी वाटर प्यूरिफिकेशन प्लांट लगाए जाएंगे। इस परियोजना के लिए केंद्र की नीति आयोग की ओर से 2.66 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं।
10 पैसे प्रति लीटर की दर से होगी स्वच्छ जल की आपूर्ति
चीफ इंजीनियर के मुताबिक साल के आखिर तक पूरे प्रदेश में प्रति व्यक्ति 10 लीटर प्रतिदिन के मुताबिक से जलापूर्ति की जाएगी। इसके लिए परियोजना पर सभी जिलों में जल्द कार्य की शुरुआत कर दी जाएगी। इस परियोजना के तहत लोगों को महज 10 पैसे प्रति लीटर की दर से स्वच्छ पानी की आपूर्ति संभव होगी।
पीजीआई, चंडीगढ़ के इनवॉयरमेंट हेल्थ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविंदर खेरवाल के मुताबिक पानी में अगर फ्लोराइड की मात्रा 1.5 से अधिक हो तो दांतों का रंग बदरंग हो जाता है। अगर इसकी मात्रा अधिक हो तो हड्डियों को भी नुकसान पहुंच सकता है। पेयजल में अर्सेनिक की प्रचूरता की वजह से शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। अगर लंबे समय तक शरीर में आर्सेनिक पहुंचता है तो इस वजह से कैंसर का भी खतरा बढ़ जाता है।