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आठ हजार डिग्रियों पर लगाई रोक नहीं हटाएगी पीयू

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय ने साफ कर दिया है कि जब तक पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के तहत मिली रकम कॉलेजों के जरिए पीयू के खजाने में नहीं आ जाती, तब तक विश्वविद्यालय आठ हजार से अधिक विद्यार्थियों की डिग्रियां जारी नहीं करेगा और उन पर रोक लगी रहेगी। विशेष परिस्थितियों में यदि किसी को डिग्री की आवश्यकता होगी तो उस मामले पर विचार करेंगे लेकिन उसके बदले भी विद्यार्थी को बकाया शुल्क खुद जमा करना होगा। इसी के साथ अब नई डिग्रियां भी विश्वविद्यालय रोकने की तैयारी में है क्योंकि पिछले वर्षों में हुए दाखिले का शुल्क पीयू को नहीं मिला। इसे लेकर विद्यार्थी चिंतित हैं।
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पंजाब के कॉलेजों में शिक्षा पा चुके विद्यार्थी अपनी डिग्रियां आदि लेने जा रहे हैं तो उन्हें बताया जा रहा है कि पीयू की ओर से कॉलेजों को डिग्रियां नहीं दी गई हैं। इसके लिए कारण भी बकाया शुल्क को बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि कई विद्यार्थियों को नौकरी के लिए डिग्री की जरूरत पड़ी तो उन्होंने खुद अपनी जेब से शुल्क अदा किया है। हालांकि ऐसे विद्यार्थी अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते, क्योंकि वे भविष्य को लेकर चिंतित हैं। हाल ही में उत्तीर्ण हुए विद्यार्थियों को भी अपनी डिग्रियां की चिंता सता रही है।
ऐसे होते हैं मुफ्त में दाखिले
पंजाब विश्वविद्यालय हर साल पंजाब के एससी, एसटी विद्यार्थियों को मुफ्त में दाखिले देता है। साथ ही पीयू से संबद्ध 196 कॉलेजों में भी हजारों विद्यार्थियों को दाखिले मुफ्त में दिए गए। इन विद्यार्थियों को केंद्र सरकार से पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप मिलती है जो पंजाब सरकार के खाते में आती है। सरकार को यह स्कॉलरशिप की रकम कॉलेजों को देनी होती है, लेकिन यह रकम कई वर्षों से नहीं दी गई। अब तक 21.16 करोड़ रुपये पंजाब सरकार पर बकाया है। जब पूरी रकम कॉलेजों के माध्यम से पीयू को नहीं मिली तो विवि ने इन डिग्रियों पर दो साल पहले रोक लगा दी। उसके बाद संभावना बन रही थी कि यह रोक जल्द हटेगी, लेकिन अब पीयू ने साफ कर दिया कि जब तक रकम नहीं मिलेगी, तब तक डिग्रियां विद्यार्थियों को नहीं देंगे।
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यह है बकाया
पंजाब विश्वविद्यालय पंजाब सरकार से 2014-15 का 32.75 लाख, 2015-16 का 1.23 करोड़, 2016-17 का 3.31 करोड़, 2017-18 का 4.56 करोड़, 2018-19 का 5.70 करोड़, 2019-20 का 5.93 करोड़ रुपये बकाया है। कुछ समय पहले पंजाब सरकार ने लगभग पांच करोड़ रुपये जरूर दिए थे, लेकिन बकाया रकम अभी भी 21 करोड़ से अधिक है। यह रकम पीयू के खजाने में आएगी, उसके बाद ही संकट के बादल छंटेंगे।
कोट
कॉलेजों पर शुल्क बकाया है। जैसे ही वह जमा होगा तो डिग्रियां जारी कर दी जाएंगी। उच्चाधिकारियों के जो आदेश हैं, उसका पालन किया जाएगा। किसी विद्यार्थी को डिग्री की बहुत आवश्यकता है तो वह प्रकरण उच्चाधिकारियों को भेजेंगे। वहां से निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी। -प्रो. जगत भूषण, परीक्षा नियंत्रक
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