चंडीगढ़। नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ उठ रही आवाज को समर्थन देने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के विद्यार्थियों ने भी आवाज बुलंद की है। छात्रों ने कहा कि नेपाल सरकार युवाओं के साथ अन्याय कर रही है और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
विद्यार्थियों का कहना है कि रोजगार के अवसर न मिलने से नेपाल के युवा पहले ही आक्रोशित हैं और अब सरकार उनकी बात सुनने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। पीयू छात्रों ने सवाल उठाया कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों में 19 युवाओं की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा? पीयू के विद्यार्थियों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए नेपाल सरकार से युवाओं की आवाज सुनने और बेरोजगारी व भ्रष्टाचार जैसे मूल मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की है।
रोजगार देने में विफल रही सरकार
नेपाल सरकार लगातार युवाओं को रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं देने में फेल हुई है। इसलिए भी युवाओं का गुस्सा फुटकर बाहर आया है। सोशल मीडिया से युवा अपनी आवाज उठा रहे थे, उसे दबा दिया गया। बदले में विद्यार्थियाें की हत्या कर दी गई। सरकार ने उनकी सुनने की बजाय अपने फैसले युवाओं पर थोपे। सरकार को युवाओं की बात सुननी चाहिए।
सारा, पीएसयू ललकार
प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाना गलत
युवाओं की आवाज बेहद महत्वपूर्ण है। नीतिगत चर्चा, शांतिपूर्ण धरने, समाज में भागीदारी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता से बदलाव लाएं। क्योंकि प्रदर्शन हमेशा शांतिपूर्ण होने चाहिए। प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाना भी दुर्भाग्यपूर्ण है और पूर्व प्रधानमंत्री को पीटना व उनकी पत्नी को जिंदा जला देना भी दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार उनकी आवाज सुनें। शिकायतों को स्वीकारें, पारदर्शिता अपनाएं और भरोसा बहाल करें।
शीशपाल, पीएचडी स्कॉलर
युवाओं के बलिदान को याद हमेशा याद रखे नेपाल की जनता
डेमोक्रेसी आने के बाद लोगों को आशा थी की सबकी सुनी जाएगी। लेकिन वहां डेमोक्रेसी स्पेस को कम किया गया। युवाओं की कनेक्विटी को खत्म करने के लिए सोशल मीडिया बैन किया गया। जिन विद्यार्थियों की मौत हुई है, उन्हें नेपाल की जनता को भूलना नहीं चाहिए। क्योंकि वह देश के लिए कुर्बान हुए हैं। हालात ठीक होने के बाद देश के लोग उनके बलिदान और योगदान को याद जरूर रखें। उन्हें और उनके परिवारों को सम्मान दिया जाना चाहिए।
मोहित मंडेरा, ज्वाइंट सेक्रेटरी पीयू
सोशल मीडिया पर बैन लोगों के मौलिक अधिकार पर हमला
26 सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का कदम लोगों के स्वतंत्र अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार पर हमला है। फर्जी खबरों और झूठी सूचनाओं का प्रसार रोकने के नाम पर सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाना बेहद गलत रास्ते की ओर बढ़ना है जो लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की बजाय उन्हें कमजोर करता है। 19 युवा प्रदर्शनकारियों को मारा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
शेषनाथ तिवारी, आइसा पीयू