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अप्रैल के दूसरे सप्ताह में हो सकते हैं पीयू सीनेट चुनाव

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय अप्रैल के दूसरे सप्ताह में सीनेट चुनाव करवाने की तैयारी में है। चुनाव प्रक्रिया पहली अप्रैल से ही शुरू हो सकती है। अभी अस्थायी चुनाव कार्यक्रम तैयार हो रहा है, जो चांसलर कार्यालय को भेजा जाएगा। हालांकि पीयू फाइनल चुनावी कार्यक्रम हाईकोर्ट के निर्णय आने के बाद ही ले पाएगी।
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चांसलर कार्यालय से हाल ही में पीयू को एक पत्र मिला है, जिसमें कहा गया है कि पीयू सीनेट चुनाव को लेकर कार्यक्रम तय करे और इसकी जानकारी उन्हें भी दें। सूत्रों का कहना है कि चांसलर कार्यालय से आए पत्र के जवाब में पीयू अब चुनाव कार्यक्रम बनाने में जुटी है। हालांकि अभी परीक्षाओं की तैयारी भी चल रही है। 15 फरवरी से परीक्षाएं होंगी, जो मार्च तक चलेंगी। अप्रैल में रिजल्ट निकाले जाएंगे और फिर मई में फाइनल परीक्षाएं हो सकती हैं। ऐसे में पीयू के पास राहत वाला माह अप्रैल ही बचता है। ऐसे में अप्रैल में ही सभी चुनावी प्रक्रियाएं पूरी हो सकती हैं। यदि अप्रैल में चुनाव नहीं हुआ तो जुलाई-अगस्त इंतजार करना होगा। उसी दौरान फिर सिंडिकेट के चुनाव होंगे और फिर डीन के चुनाव करने होंगे।
सभी चुनाव एक साथ करवाने की योजना
सूत्रों का कहना है कि पीयू सीनेट के सभी वर्गों के चुनाव एक साथ करवाने की योजना बना रही है। यह नहीं होगा कि फैकल्टी चुनाव पहले करवा लिए जाएं और उसके बाद स्नातक वर्ग चुनाव हों। दो से चार दिन में ही सभी चुनाव करवाने की योजना है। हालांकि पीयू ने अभी इसको लेकर कोई सार्वजनिक बयान या घोषणा नहीं की है लेकिन चांसलर कार्यालय को जवाब जरूर भेजे जाने की तैयारी हो रही है।
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कभी भी जारी हो सकते हैं मनोनीत सदस्यों के नाम
सूत्रों का कहना है कि पीयू जैसे ही चांसलर कार्यालय को चुनाव का कार्यक्रम भेजेगी। उसके साथ कभी भी मनोनीत सदस्यों के नाम सामने आ जाएंगे। इस बार मनोनीत सदस्यों के नाम पहले आने की तैयारी चल रही है जबकि पिछले चुनावों के दौरान ऐसा नहीं था। पहले चुनाव होते थे और बाद में मनोनयन। अगर ऐसा होगा तो फिर चुनावी माहौल पर भी फर्क पड़ सकता है। हालांकि दोनों ग्रुप अभी से तैयारी में लगे हैं। बोर्ड ऑफ गवर्नेंस की संभावनाएं कम हो गई हैं। क्योंकि अभी तक इसको लेकर कोई हलचल नहीं हुई है और न ही यूजीसी व चांसलर कार्यालय से कोई पत्र आया है। हालांकि एक बार जरूर यूजीसी ने पीयू से राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर जवाब मांगा था और उसी में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस की बात की गई थी।
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