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अमेरिका के SC में जज बन सकता है चंडीगढ़ का बेटा

Mon, 15 Feb 2016 01:40 PM IST
सुमित सिंह श्यौराण/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के पूर्व प्रोफेसर का बेटा दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की सर्वोच्च अदालत में जज बन सकता है।
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अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के जज एंटोनिन स्कालिया के आकस्मिक निधन के बाद उनकी जगह श्रीनिवासन की नियुक्ति की अटकलें तेज हो गई हैं क्योंकि राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सुप्रीम कोर्ट की ज्यूरी के लिए जो नाम शार्टलिस्ट किए हैं, उनमें श्रीकांत श्रीनिवासन भी शामिल हैं।

श्रीकांत सुप्रीम कोर्ट का जज बनने की सीढ़ी माने जाने वाले यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट में जज हैं। मई 2013 में सीनेट ने 97 मतों से उनके नामांकन को मंजूरी दी थी।
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उनकी नियुक्ति के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़ा था। वह राष्ट्रपति ओबामा के उप सॉलिसिटर जनरल के रूप में काम कर चुके हैं। जॉर्ज बुश के कार्यकाल में भी उन्होंने सॉलिसिटर जनरल के सहायक के रूप में काम किया है।

श्रीकांत का बचपन पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में ही बीता है। उनके पिता प्रो. टीपी श्रीनिवासन मूल रूप से तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के पास के गांव तिरुवेंकटनाथपुरम से ताल्लुक रखते हैं। प्रो.टीपी करीब 13 साल तक पीयू के गणित विभाग में शिक्षक रह चुके हैं।

पीयू के पूर्व कुलपति और गणित के जाने माने प्रोफेसर आरपी भांबा ही प्रो.टीपी श्रीनिवासन की प्रतिभा को परखकर मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च सेंटर (टीआईएफआर) से पंजाब यूनिवर्सिटी में लाए थे।
 
पीयू एफ-6 मकान में रहा परिवार
प्रो.भांबा ने बताया कि प्रो.श्रीनिवासन पीयू कैंपस के मकान नंबर एफ-6 में रहते थे। श्रीकांत का जन्म 23 फरवरी 1967 को पीजीआई में हुआ था। प्रो.टीपी श्रीनिवासन का एक बेटा और दो बेटियां थीं। एक बेटी याहू को शुरू करने वाली 3 सदस्यों की टीम की मुख्य सदस्य थी।

भांबा ने बताया कि श्रीकांत के पिता एकेडमिक में काफी अच्छे थे। उनके रिसर्च वर्क को देखते हुए बिना पीएचडी डिग्री रीडर और फिर प्रोफेसर बनाया गया। अमेरिकी यूनिवर्सिटी कंसास से अच्छा ऑफर मिलने के बाद प्रो. टीपी श्रीनिवासन 1968 में अमेरिका में ही चले गए। कुछ समय बाद उनका परिवार भी वहां चला गया।

1990 में पीयू कैंपस आए थे श्रीकांत
प्रो.भांबा ने बताया कि श्रीकांत श्रीनिवासन और उनके पिता प्रो.टीपी श्रीनिवासन का पीयू से काफी लगाव रहा है। प्रो.टीपी कई बार अमेरिका से पंजाब यूनिवर्सिटी में आए। उन्होंने बताया कि श्रीकांत भी 1990-91 में पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में अपना घर देखने के लिए आए थे। भांबा ने बताया कि श्रीकांत जब पीयू आए तो उनके पास ही रुके थे।   
 
वीसी ने 100 रुपये अधिक वेतन लगाया
टीपी श्रीनिवासन ने 1955-56 में होशियारपुर स्थित पीयू कैंपस के गणित विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर ज्वाइन किया। प्रो.आरपी भांबा ने बताया कि श्रीनिवासन टीआईएफआर में काफी अच्छे रिसर्च स्कॉलर थे। उनकी काबिलियत को देखते हुए प्रो. हंसराज गुप्ता के साथ वह उन्हें गणित विभाग में लेकर आए। प्रो. भांबा ने बताया कि कुलपति प्रो.देव आनंद कुमार ने टीपी श्रीनिवासन को 400 रुपये वेतन का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया। लेकिन उनकी प्रतिभा को देखते हुए कु लपति ने 500 रुपये वेतन देने का फैसला लिया।
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नियुक्ति पर सामने आए राजनैतिक मतभेद
स्कालिया के निधन के बाद खाली जगह भरने के मामले में राजनैतिक मतभेद सामने आए हैं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि वह निश्चित समय में नए न्यायमूर्ति को नामित करेंगे जबकि सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों में बहुमत रखने वाली रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह काम देश के नए राष्ट्रपति के लिए छोड़ा जाना चाहिए।
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