चंडीगढ़ दमकल विभाग में 273 फायरमैन की हुई भर्ती के मामले में पंजाब यूनिवर्सिटी संदेह के घेरे में है। दरअसल, फर्जी तरीके से फायरमैन भर्ती के मामले का खुलासा होने के बाद चंडीगढ़ पुलिस लगातार पीयू से फायरमैन कर्मियों का रिकॉर्ड मांग रही थी लेकिन कई महीने तक पीयू ने रिकाॅर्ड नहीं दिया।
पीयू ने जब 273 फायरमैन का रिकॉर्ड दिया तो उसमें काफी हद तक वीडियो डाटा खुल ही नहीं रहा है। सूत्रों ने बताया कि शुरुआत में पीयू ने खुद कहा था कि कुछ सेंटरों की वीडियोग्राफी करप्ट हो गई है। पीयू की ओर से दी गई परीक्षा केंद्रों की वीडियो जब देखी तो उसमें कई फायरमैन की वीडियो करप्ट है। वीडियो के अलावा पुलिस के पास असली और फर्जी फायरमैन का पता लगाने के लिए दो और ऑप्शन हैं। पहला फर्जी और असली उम्मीदवार के फिंगर प्रिंट और दूसरा दस्तखत। बता दें कि फायरमैन की लिखित परीक्षा पीयू ने करवाई थी। सूत्रों ने बताया कि फायरमैन भर्ती के मामले की फाइल डीजीपी सुरेंद्र यादव ने मंगवा ली है।
परीक्षा केंद्रों पर नहीं थी सख्ती
बता दें कि परीक्षा केंद्रों में लिखित परीक्षा ली गई थी, वहां पर उम्मीदवारों के दस्तखत लिए गए थे लेकिन परीक्षा में बैठने से पहले कोई जांच नहीं हुई। अगर परीक्षा केंद्र में एंट्री से पहले एडमिट कार्ड और परीक्षा देने आए व्यक्ति की पहचान की होती तो कोई भी फर्जी व्यक्ति परीक्षा में नहीं बैठ सकता था।
कई महीनों से रुकी जांच चल पड़ी
सेक्टर-36 थाना प्रभारी जेपी सिंह ने बताया कि सभी फायरकर्मियों का डाटा पुलिस के पास मौजूद है। दस्तखत की जांच के लिए सीएफएसएल भेजा जा रहा है, जबकि फिंगर प्रिंट की जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच के बाद इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस अमर उजाला में छप रही खबरों के बाद दमकल विभाग में हलचल मची है।