चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय अभी नहीं खुला है, लेकिन पीयू के इंजीनियरिंग व औषधि विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों को छात्रावास में बुलाने की तैयारी की जा रही है। इसी के साथ इनकी कक्षाएं भी ऑफलाइन शुरू हो सकती हैं। इस पर अंतिम निर्णय फरवरी में ही ले लिया जाएगा और 15 मार्च से छात्रावास खोलने की तैयारी है।
पीयू के छात्रावासों में अब तक केवल शोधार्थियों को ही बुलाया गया है। बाकी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास के दरवाजे नहीं खुले हैं। प्रबंधन से जुड़े विषयों के विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम, प्लेसमेंट समय के अनुसार जुड़े हुए हैं। यानी निर्धारित समय के अनुसार उन्हें कोर्स पूरा करना होता है। इसी में इंजीनियरिंग व औषधि विज्ञान आदि कोर्स के विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को समय-समय पर प्रयोगशालाएं चाहिएं क्योंकि इसमें जितनी लिखित (थ्यूरी) की जरूरत होती है, उतनी ही प्रयोग की। लगभग एक साल से विद्यार्थी पीयू नहीं आ पा रहे हैं। इसके कारण उनका कार्य प्रभावित हो रहा है। वे प्रयोग नहीं सीख पा रहे हैं, जबकि सबसे अधिक जरूरत नौकरी के समय प्रयोग की होती है।
यह है आंकड़ा
इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों की संख्या 3000 से अधिक है और औषधि विज्ञान से जुड़े विद्यार्थियों की संख्या 1300 से अधिक है। पीयू के ये दोनों विभाग पीयू की रैंकिंग को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। इंजीनियरिंग के विद्यार्थी सर्वाधिक होने के कारण उनकी प्लेसमेंट भी बेहतर होती है। औषधि विज्ञान विभाग पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां की शोध से लेकर शिक्षा भी बेहतर है। पीयू के इन विभागों का कार्य व विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसी को देखते हुए इन्हें छात्रावास में बुलाने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इन दोनों विभागों में 40 फीसदी विद्यार्थी बाहर से आते हैं। बाकी आसपास के राज्यों के ही हैं। इस तरह छात्रावासों को आसानी से खोला जा सकेगा और कोरोना दिशानिर्देशों का पालन किया जा सकेगा।
यूबीएस विभाग का अपना महत्व, इन विद्यार्थियों को भी बुलाने की जरूरत
पीयू के यूबीएस (यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल) विभाग की अपनी अलग छवि है। इस विभाग की रैंकिंग भी बेहतर है। यहां से प्लेसमेंट का आंकड़ा भी बेहतर है। पिछले वर्षों में यहां से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को 50 लाख रुपये से अधिक का पैकेज मिला है। मांग उठ रही है कि इन विद्यार्थियों को भी कैंपस में बुलाया जाना चाहिए, क्योंकि इनका कार्य भी समयबद्ध है। सूत्रों का कहना है कि 15 मार्च के बाद छात्रावास के रास्ते इन विद्यार्थियों के लिए भी खुल सकते हैं।