चंडीगढ़। पीयू प्रशासन वर्ष 2019, 2020 और 2021 के एक हजार से ज्यादा टॉपर छात्रों को पदक देना भूल गया है। पिछले वर्ष पीयू ने तीन साल बाद दीक्षांत समारोह का आयोजन करवाया था और उस दौरान सिर्फ पीएचडी के उम्मीदवारों को ही डिग्रियां भेंट की थीं। उस दौरान कहा गया था कि स्नातक और परास्नातक के विद्यार्थियों को स्वर्ण और रजत पदक भेंट करने के लिए अलग से कार्यक्रम का आयोजन करवाया जाएगा। छात्र एक साल से कार्यक्रम का इंतजार कर रहे हैं और अब उन्हें पता चला है कि पीयू इस बार दीक्षांत समारोह में उन्हें सम्मानित नहीं करेगा। इसके बाद से वे लगातार एडमिन ब्लॉक के चक्कर लगा रहे हैं और दीक्षांत समारोह में उन्हें भी शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
पिछले वर्ष दीक्षांत समारोह में सिर्फ पीएचडी के 1128 उम्मीदवारों को डिग्रियां भेंट की गई थीं। पीयू ने कोरोना महामारी के कारण पिछले दो साल की पीएचडी की डिग्रियों का बोझ होने के कारण पिछले वर्ष 2022 में स्नातक और परास्रातक के छात्रों को स्वर्ण और रजत पदक नहीं देने का फैसला लिया था। लेकिन इस दौरान पीयू ने कहा था कि पीएचडी से अलग दीक्षांत समारोह आयोजित करवाकर पिछले सभी वर्षों के टॉपर्स को पदक भेंट किए जाएंगे। इस बार पीयू ने वर्ष 2022 के स्नातक और परास्नातक के लगभग 500 छात्रों को स्वर्ण और रजत पदक देने के साथ पीएचडी के लगभग 500 उम्मीदवारों को डिग्री भेंट करने का फैसला लिया है। इसके बाद से 2019, 2020 और 2021 के छात्र अपने पदक को लेकर परेशान हो रहे हैं। छात्रों को कहना है कि वे पूरे कोर्स में एक-एक अंक को लेकर मेहनत करते हैं, तब हजारों बच्चों में टॉप कर स्वर्ण पदक लेने के योग्य बनते हैं। पीयू प्रशासन छात्रों की मेहनत को नकार कर उनका हक मार रहा है। छात्रों ने सीनेटरों को भी पुराने सत्रों के छात्रों को दीक्षांत समारोह में शामिल करने के लिए ज्ञापन सौंपा है।
पदक छात्रों का हक, प्रशासन उनका मनोबल तोड़ रहा : वर्तमान में पढ़ाई को लेकर प्रतियोगी माहौल है। हर क्षेत्र में टॉपर्स के लिए सम्मान पाना उनके लिए एक प्रेरणा होता है, इसके साथ ही यह उनके मनोबल को बढ़ाता है। पीयू पुराने सत्र के छात्रों को पुरस्कार नहीं देकर उनका मनोबल तोड़ने का काम कर रही है।
- आयुष खटकड़ अध्यक्ष, पीयू छात्रसंघ
वर्ष 2022 के छात्रों को दी जा रही डिग्री : इस बार सत्र 2022 के यूजी और पीजी के छात्रों को पदक के साथ पीएचडी उम्मीदवारों को डिग्री भेंट की जा रही है। - प्रो. जगत भूषण, परीक्षा नियंत्रक, पीयू