उम्मीदवारों ने यह बताया
परीक्षा देने वाले एक उम्मीदवार ने बताया कि कुल 60 से 57 प्रश्नों के विकल्प बोल्ड में थे। एक अन्य उम्मीदवार ने बताया कि यह पुष्टि नहीं की जा सकी कि बोल्ड टेक्स्ट में साझा किए गए सभी उत्तर सही थे या नहीं। हालांकि कई उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया पर पेपर को साझा कर अधिकांश बोल्ड विकल्पों को सही उत्तर बताया है। एक अन्य परीक्षार्थी ने बताया कि कई प्रश्नों में काफी गलतियां थीं। कुछ प्रश्नों की शब्दावली ठीक नहीं थी। वाक्य विन्यास सही नहीं थे। कुछ ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा के आयोजन की पूरी प्रक्रिया बहुत जल्दी पूरी की गई है। मात्र एक महीने के भीतर परीक्षा का विज्ञापन देकर परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा का विज्ञापन 18 फरवरी को आया और 12 मार्च को ही परीक्षा आयोजित कर दी गई।
गंभीरता से जांच हो: रमन कुमार
रमन कुमार ने कहा कि दूसरे सत्र की परीक्षा बीएड से संबंधित शिक्षकों की थी। रविवार को सामाजिक अध्ययन, विज्ञान, गणित, कला व शिल्प और शारीरिक शिक्षा विषयों की परीक्षा हुई। सबसे ज्यादा परीक्षार्थी एसएसटी का पेपर ही देते हैं और वही पेपर सवालों के घेरे में आ गया है। चार विकल्पों में से एक का हाईलाइट होना संदेह पैदा करता है। इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। यह पेपर रद्द होना तय है लेकिन मेहनत कर पढ़ने वाले परीक्षार्थियों के नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है। दूर-दराज से पेपर देने पहुंचे परीक्षार्थियों खासकर महिलाओं के समय व पैसे की भरपाई कौन करेगा। महिला परीक्षार्थियों के साथ उनके परिवार का एक-एक सदस्य भी आया था। इस सारी लापरवाही का खामियाजा परीक्षार्थी क्यों भुगतें।
जो भी जिम्मेदार होगा, कार्रवाई करेंगे: प्रमुख सचिव
स्कूली शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव जसप्रीत तलवार ने कहा कि यह मामला हमारे संज्ञान में आ चुका है। अगर शिकायत सही पाई जाती है तो परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। जो भी जिम्मेदार होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।