आठ अफसरों को किया था तलब
इससे पहले, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी पीएम की सुरक्षा में चूक की घटना के तुरंत बाद तीन सदस्यीय कैबिनेट सचिवालय के सचिव (सुरक्षा) सुधीर कुमार सक्सेना, आईबी के संयुक्त निदेशक बलबीर सिंह और आईजी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप एस. सुरेश की कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने पंजाब में उस फ्लाईओवर का दौरा करते हुए जांच का काम शुरू किया था, जिस पर प्रधानमंत्री का काफिला किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क जाम किए जाने के कारण 15-20 मिनट तक फंसा रहा था।
इस कमेटी ने तब पंजाब के तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) नरेश अरोड़ा, एडीजीपी (साइबर क्राइम) जी. नागेश्वर राव, फिरोजपुर रेंज के डीआईजी इंद्रबीर सिंह, फरीदकोट रेंज के डीआईजी सुरजीत सिंह, आईजी (काउंटर इंटेलिजेंस) राकेश अग्रवाल, फिरोजपुर के एसएसपी हरमनदीप सिंह, मोगा के एसएसपी चरणजीत सिंह को तलब किया था। कमेटी का कहना था कि फिरोजपुर में पीएम के दौरे के समय उक्त अफसर उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार थे। गृह मंत्रालय ने उस समय भी पंजाब सरकार से ‘चूक की जिम्मेदारी तय करने और कड़ी कार्रवाई करने’ को कहा था।
चन्नी सरकार ने लिया कमजोर एक्शन
पीएम की सुरक्षा में चूक के बाद जब केंद्र सरकार की तरफ से दोषी अफसरों पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाया गया तो सूबे के तत्कालीन चरणजीत सिंह चन्नी सरकार ने मामूली एक्शन लेकर मामला रफा-दफा करने वाला तरीका अपनाया। पंजाब पुलिस ने फिरोजपुर के कुलगढ़ी थाने में आईपीसी की धारा 283 के तहत बिना किसी को नामजद किए एफआईआर दर्ज की थी। इस धारा के अधीन आरोपी को थाने से ही जमानत मिल जाती है और सजा के तौर पर अधिकतम 200 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
एसपीजी एक्ट के तहत कार्रवाई पर विचार
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में चूक के उक्त मामले में पंजाब पुलिस के अफसरों के खिलाफ विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) अधिनियम के तहत कार्रवाई पर विचार कर रहा है। एसपीजी अधिनियम की धारा-14 संबंधित राज्य सरकार को पीएम की यात्रा के दौरान एसपीजी को सभी प्रकार की सहायता मुहैया कराने की जिम्मेदार प्रदान करती है।