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Chandigarh News: कार्यकारी प्रिंसिपलों को दोबारा व्याख्याता के पद पर भेजने का आदेश का किया विरोध

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चंडीगढ़। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स यूटी चंडीगढ़ ने शिक्षा विभाग की ओर से बुधवार को जारी निर्देश के निर्णय की निंदा की है, जिसके तहत कार्यकारी प्रिंसिपलों को दोबारा व्याख्याता के पद पर भेजने का आदेश जारी हुआ है। यह निर्णय अन्यायपूर्ण, मनमाना और शिक्षकों के मनोबल को गिराने वाला है।
जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स के विभिन्न नेताओं सविंदर सिंह, रणबीर राणा, शिव मूरत, गुरप्रीत कौर एवं अन्य ने इस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि प्रिंसिपलों को दोहरे चार्ज देने का कदम तानाशाही और अव्यावहारिक है जो विभाग की खराब प्रशासनिक योजना को दर्शाता है। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो इस अन्यायपूर्ण आदेश के खिलाफ सशक्त आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी।
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वर्तमान में लगभग 25 प्रतिशत प्रिंसिपल के पद प्रतिनियुक्त अधिकारियों द्वारा भरे गए हैं, जिन्हें उनके मूल राज्य विभागों में वापस भेजा जाना चाहिए ताकि चंडीगढ़ यूटी के योग्य व्याख्याताओं को पदोन्नति का अवसर मिल सके। अधिकांश यूटी कैडर के व्याख्याता 35 वर्षों की सेवा के बाद भी एक बार भी पदोन्नत नहीं हो पाए हैं, जो अत्यंत निराशाजनक है। चूंकि अब चंडीगढ़ में सेवाएं केंद्रीय सिविल सेवा ढांचे के अंतर्गत आती हैं और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति नीति में कोई निश्चित कोटा निर्धारित नहीं है, इसलिए यूटी कैडर के शिक्षकों को उनके पदोन्नति अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
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चंडीगढ़ के अनेक सरकारी स्कूलों को उन्नत किया गया है, किंतु वहां प्राचार्य के पद बनाए नहीं किए गए हैं। जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स की यह मांग है कि इन पदों को तत्काल स्वीकृत किया जाए ताकि योग्य व्याख्याताओं को स्थायी प्राचार्य के रूप में पदोन्नत किया जा सके और स्कूलों का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से चलता रहे।
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