हरियाणा सरकार की रेगुलराइजेशन पालिसी से सरकारी कर्मचारी नाराज हो गए हैं। सर्व कर्मचारी संघ ने इस नीति के विरोध में पांच जून से आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है।
संघ का दावा है कि इस नीति में लगाई शर्तों के कारण मात्र तीन हजार कच्चे कर्मचारी ही पक्के हो पाएंगे। संघ ने दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सभी प्रकार के पार्टटाइम, डेलीवेजर्स, अनुबंध और तदर्थ आधार पर लगे कर्मचारियों को बिना शर्त पक्का करने की मांग की है।
कर्मचारी संघ करेगा खंड स्तर पर आंदोलन
संघ के प्रधान धर्मबीर सिंह फौगाट, महासचिव सुभाष लांबा, मुख्य संगठनकर्ता वीरेंद्र डंगवाल, वरिष्ठ उपप्रधान सरबत सिंह पूनिया और उपमहासचिव जीवन सिंह ने जारी बयान में कहा कि मंत्रिमंडल ने जो नीति मंजूर की है, उसके विरोध में पांच जून को खंड स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
सरकार शर्तें लगाकर कच्चे कर्मचारियों को न तो पक्का करना चाहती है और न ही उनकी प्रमुख मांगों का समाधान करना चाहती है। इसलिए संघ 17 और 18 जून को सभी विधायकों, सांसदों को बाजारों, शहरों में प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन देगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा कर्मचारी तालमेल कमेटी ने 26 फरवरी, 2014 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान भी नाराजगी जताते हुए कहा था कि उक्त नीति से 2-3 हजार ही कर्मचारी पक्के हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि उक्त नीति घोषित होने से अपने नियमितिकरण होने की बाट जोह रहे बड़ी तादाद में कर्मचारियों को आघात लगा है।
संघ ने दे दिया है अल्टीमेटम
संघ के नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों मसलन केंद्र के समान ग्रेड पे और भत्ते देने, कैशलेस मेडिकल सुविधा, मिनिस्ट्रीयल स्टाफ को पंजाब के समान वेतनमान, रोडवेज के 3519 रूट परमिटों को निजी हाथों में न देने, आउटसोर्सिग, निजीकरण, फ्रेंचाईजी, ठेकाकरण नीतियां रद करने, रोडवेज के चालकों, परिचालकों को रेगुलर करने, जोखिमपूर्ण हालात में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता देने, ठेकेदारों को बीच से हटाकर ठेके पर लगे कर्मचारियों को सीधा विभागों के मार्फत लगाने, ठेके पर लगे कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी के समान वेतनमान देने, अनुबंध कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान अंतिम राहत देने, जनवरी 2006 से भर्ती हुए नए कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम के दायरे में लाने, विभागीय कर्मचारियों की ग्रेड-पे अपग्रडेशन की शिकायतों का निवारण करने, विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता देने, 15 हजार रुपये न्यूनतम वेतनमान देने जैसी मांगों को जब तक नहीं माना जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा कर्मचारी तालमेल कमेटी के तीनों घटकों ने निर्णायक आंदोलन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। जून के अंतिम सप्ताह में इसकी घोषणा की जाएगी।