एक जनवरी तक होगा निजीकरण
प्रशासन ने एक जनवरी तक बिजली विभाग को कंपनी को सौंपने की योजना बनाई है, जिसके खिलाफ विभाग के कर्मचारियों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है। शुक्रवार को सेक्टर-17 में बड़ा प्रदर्शन हुआ। यूनियन के गोपाल दत्त जोशी ने कहा कि कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ेगा।
प्रधान ध्यान सिंह ने कहा कि एस्मा जैसा काला कानून लागू करने से निजीकरण के खिलाफ आंदोलन कमजोर नहीं किया जा सकता। नेशनल को-ऑर्डिनेशन के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कई सवाल उठाए। कहा कि मुनाफा कमाने वाले सरकारी विभाग को कौड़ियों के भाव में निजी हाथों में सौंपना आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना नहीं है, बल्कि यह पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना कहलाता है। हजारों करोड़ की संपत्ति को 871 करोड़ में एक निजी कंपनी को सौंपा जा रहा है। इसमें भारी भ्रष्टाचार की बू आ रही है। उन्होंने कहा कि कोलकाता की यह वही कंपनी है, जिसने इलेक्ट्रॉल बांड में भाजपा को कई करोड़ का चंदा दिया था। सभी नेताओं ने मिलकर 13 दिसंबर को राष्ट्रीय निजीकरण विरोधी दिवस मनाने की भी घोषणा की, जिसमें देशभर में बिजली कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करेंगे।
प्रदर्शन दबाने के लिए प्रशासन ने लगाया एस्मा
बिजली कर्मचारियों के धरने-प्रदर्शन को दबाने के लिए प्रशासन ने चंडीगढ़ में छह महीने के लिए ''एस्मा'' लगा दिया है। प्रशासक के सलाहकार राजीव वर्मा ने आदेश जारी कर ईस्ट पंजाब एसेंशियल सर्विस (मेंटेनेंस) एक्ट-1947 को लागू कर दिया है। आदेश में लिखा कि बिजलीकर्मियों के हड़ताल से बिजली की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर शहरवासियों पर पड़ सकता है इसलिए इंजीनियरिंग विभाग के इलेक्ट्रिसिटी विंग के कर्मचारियों के अगले छह माह तक हड़ताल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। चीफ इंजीनियर और एसई को यह अधिकार दिया गया है कि वे इस अधिनियम के उल्लंघन के मामलों में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
ट्रांसफर स्कीम बनाई नहीं, कंपनी का कर दिया गठन
प्रशासन ने अपने स्तर पर बड़ी गलती की है। सबसे पहले ट्रांसफर स्कीम की अधिसूचना जारी करनी थी, जिसमें कर्मचारियों के सर्विस से जुड़े सभी नियम व शर्तें होंगी। प्रशासन ने यूनियन को भी वादा किया था कि पहले ट्रांसफर स्कीम बनाएंगे, उसके बाद काम आगे बढ़ाएंगे। यहां तक कहा गया कि ट्रांसफर स्कीम का ड्राफ्ट बनने के बाद सबसे पहले कर्मचारियों को दिखाया जाएगा, उनसे सुझाव मांगे जाएंगे लेकिन अधिकारियों ने वादा तोड़ दिया और 22 नवंबर को कंपनी को एलओआई जारी कर दिया। यही नहीं, चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड का भी गठन कर दिया। उधर, कर्मचारियों का क्या होगा, यह उन्हें पता ही नहीं है क्योंकि अधिकारी सिर्फ जुबानी वादा कर रहे हैं कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाएगी लेकिन ट्रांसफर स्कीम जारी नहीं की जा रही है।