चंडीगढ़। जीएमएसएच- 16 की नर्सिंग ऑफिसर मलकीयत कौर ड्यूटी के दौरान नर्सिंग ऑफिसर से लेकर एक दर्जी तक की भूमिका अदा कर चुकी हैं। मलकीयत का कहना है कि इस महामारी के दौर में उन्हें जिस रूप में मरीजों की सेवा करने का अवसर मिल जाए, उसे गंवाने की गलती नहीं कर सकती। मलकीयत ड्यूटी के दौरान संक्रमित मरीज के संपर्क में आकर खुद भी संक्रमित हो चुकी हैं, बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है। वह दोगुने जोश और उत्साह के साथ कोरोना टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में जुटी हुई हैं। वह मौजूदा समय में जीएमएसएच- 16 के 5वें तल पर बनाए गए टीकाकरण केंद्र के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
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एक दिन में बनाती थीं 60 से 70 मास्क
मिलकीयत ने बताया कि कोरोना के शुरुआती दौर में जब अचानक से मास्क की डिमांड बढ़ गई तो उन्होंने ऑपरेशन थिएटर में उपलब्ध सिलाई मशीन से एक-एक दिन में 60 से 70 मास्क बनाएं। उसके बाद उनकी ड्यूटी फ्लू क्लीनिक में लगा दी गई, जहां वह 27 अगस्त को संक्रमित हो गई। इसके बाद उन्हें 10 सितंबर तक क्वारंटाइन रहना पड़ा। इस दौरान उन्होंने संक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए घर के आंगन में ही अनुलोम विलोम और कई सांस संबंधी व्यायाम किए जिससे उन्हें काफी फायदा हुआ। उनके संक्रमित हो जाने पर उनके पति सरदार गुरजीत सिंह व दोनों बेटों को उनके साथ क्वारंटीन रहना पड़ा।
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पॉजिटिव होने पर बदल गया लोगों का व्यवहार
मलकीयत का कहना है कि जिन लोगों की सेवा करते हुए वह पॉजिटिव हो गई, वहीं उन्हें हेय की दृष्टि से देखते थे। इस कारण उन्हें बहुत दुख हुआ। मलकीयत ने बताया कि लोग उनसे और उनके परिवार से ऐसे दूरी बनाए रखते थे जैसे उन्हें कोई छूत की बीमारी हो गई है जबकि वह लोगों को संक्रमण से बचाने के दौरान ही इसकी चपेट में आई थी। मलकीयत का कहना है कि संक्रमित मरीजों को लेकर समाज में लोगों की बदलती अवधारणा बिल्कुल गलत है। उन्हें यह बात समझना होगा कि आज जो किसी और पर गुजर रही है कल उन पर भी गुजर सकती है। ऐसे में एक-दूसरे से किनारा करने की बजाय हम सब को एक दूसरे की ताकत बनना होगा।