चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने संपत्ति ट्रांसफर प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी डीड के आधार पर म्यूटेशन अपने आप हो जाएगा। इसके लिए अलग से आवेदन या एस्टेट ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रशासन ने इसे ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम नाम दिया है, जो पूरी तरह डिजिटल है और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत जैसे ही कोई प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड होती है, उसी समय म्यूटेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस और एस्टेट ऑफिस के बीच डाटा का आदान-प्रदान रियल टाइम में होता है। हर स्टेप डिजिटल तरीके से ट्रैक होता है और संबंधित व्यक्ति को उसकी जानकारी मिलती रहती है। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और जवाबदेही भी तय होती है।
डीसी-कम-एस्टेट ऑफिसर निशांत कुमार यादव ने बताया कि ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम लोगों की सुविधा के लिए एक बड़ा बदलाव है। अब लोगों को म्यूटेशन के लिए न तो अलग से आवेदन करना पड़ेगा और न ही दस्तावेज दोबारा जमा करने होंगे। सारी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से अपने आप पूरी हो जाएगी।
नई रजिस्ट्री कराने वालों को ही मिलेगा लाभ, पुराने मामले मैनुअल तरीके से चलेंगे
इस सिस्टम से नागरिकों को कई फायदे होंगे। न तो बार-बार ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ेंगे, न ही अतिरिक्त कागजी कार्रवाई करनी होगी। जो दस्तावेज प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के समय दिए जाते हैं, वही म्यूटेशन के लिए अपने आप इस्तेमाल हो जाएंगे। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और समय पर पूरी होगी। यह सिस्टम चंडीगढ़ के एस्टेट ऑफिस के अधीन आने वाली सभी प्रकार की संपत्तियों जैसे फ्री होल्ड, लीज होल्ड आदि पर लागू होगा, जिनका मालिकाना हक रजिस्टर्ड डीड के जरिए ट्रांसफर हुआ हो। हालांकि, यह केवल नए मामलों पर लागू होगा, यानी सिस्टम लागू होने की तारीख के बाद की रजिस्ट्री के मामलों में यह लाभ मिलेगा। पुराने मामलों में मैनुअल प्रक्रिया पहले की तरह ही चलेगी।