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चंडीगढ़: सीनेट-सिंडिकेट के बिना अटकी पदोन्नति, नाराज शिक्षकों ने दी प्रदर्शन की चेतावनी 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 04 May 2021 02:25 AM IST

सार

पंजाब विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के जनवरी में लंबे प्रदर्शन के बाद शिक्षकों के कैस साक्षात्कार तो ले लिए गए, लेकिन चार महीने बाद भी उन्हें पदोन्नति पत्र नहीं दिया गया। 
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पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

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विस्तार

चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट- सिंडिकेट के बिना शिक्षकों के कैस (कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम) भी अटकी हुई है। पंजाब विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के जनवरी में लंबे प्रदर्शन के बाद शिक्षकों के कैस साक्षात्कार तो ले लिए गए, लेकिन चार महीने बाद भी उन्हें पदोन्नति पत्र नहीं दिया गया। पुटा ने बताया कि कोरोना महामारी के वर्तमान हालातों को देखते हुए हम बातचीत से मुद्दा हल करने की कोशिश कर रहे हैं।


पंजाब विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के सदस्यों द्वारा 62 दिन के लंबे प्रदर्शन के बाद लगभग 120 शिक्षकों के कैस साक्षात्कार लिए गए थे, लेकिन चार महीने के बाद भी अभी तक उन्हें पदोन्नति पत्र जारी नहीं किया गया। पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट सर्वोच्च शासी निकाय है। शिक्षकों की प्रमोशन का अंतिम फैसला इसकी बैठक में ही किया जाता है।



हालांकि इससे पहले सिंडिकेट भी इसे अनुमति देती है, लेकिन कोरोना महामारी के कारण पिछले एक साल से सीनेट और सिंडिकेट के चुनाव आयोजित नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते इनकी बैठक भी नहीं हो पाई है। इन सबके बीच शिक्षकों के पदोन्नति के फैसले व अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पीयू प्रशासन की ओर से कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है।
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अप्रैल में लिखा पत्र, वीसी अपने स्तर पर लें फैसला

पुटा सचिव प्रो. अमरजीत सिंह ने बताया कि हम कैस साक्षात्कार के बाद कुलपति को पत्र भी लिख चुके हैं। अंतिम पत्र पुटा की ओर से 6 अप्रैल को लिखा गया था। इसमें हमने कहा था कि जब कुलपति विश्वविद्यालय के अन्य फैसले अपने स्तर पर कर सकते हैं तो शिक्षकों की पदोन्नति को क्यों अटका रखा है, इनके भी पत्र जल्द जारी किए जाएं। अध्यक्ष प्रो. मृत्युंजय दो-तीन बार कुलपति से मुलाकात करके बातचीत कर चुके हैं, लेकिन वीसी की तरफ से कोरा आश्वासन दिया जाता है और अब तो उनके आश्वासन से भी भरोसा उठ गया है। वर्तमान महामारी के चलते हम थोड़ा इंतजार कर रहे हैं, अगर जल्द शिक्षकों की पदोन्नति नहीं की गई तो हम प्रदर्शन को मजबूर होंगे।

शोध और रैंकिंग होती है प्रभावित
प्रो. अमरजीत सिंह ने बताया कि पीयू प्रशासन एक तरफ कह रहा है कि वह विश्वविद्यालय की रैंकिंग सुधार के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन बिना शिक्षकों के विकास के विश्वविद्यालय कैसे आगे बढ़ेगा। शिक्षक पढ़ाई के साथ शोध, वेबिनार इत्यादि कार्यों में संलग्न हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से उनके कार्यों को लटकाया जा रहा है। ऐसे में उनका कार्य भी प्रभावित होगा। अभी पिछले शिक्षकों की पदोन्नति बीच में अटकी है और लगभग 20 के करीब और नए शिक्षक भी पदोन्नति के योग्य हो गए हैं। ऐसे में इनकी पदोन्नति में भी देरी होगी।
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