शाहरुख खान के साथ ‘परदेस’ फिल्म में बॉलीवुड में एंट्री करने वाले अपूर्व अग्निहोत्री ने जब टीवी की दुनिया में कदम रखा तो लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया। खासकर, जस्सी जैसी कोई नहीं सीरियल से वह हर दिल का ‘अरमान’ बन गए लेकिन फिर अचानक छोटे पर्दे पर मौजूदगी कम हो गई।
कुछ समय ब्रेक के बाद अब अपूर्व को एक बार फिर छोटे पर्दे पर मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला है। इस बार वह लाइफ ओके चैनल पर फिल्म अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे के साथ अजीब दास्तां सुनाते हुए नजर आएंगे।
7 अक्तूबर से रात 9.30 बजे शुरू होने वाले सीरियल ‘अजीब दास्तां है ये’ के प्रमोशन के दौरान अपूर्व ने बताया कम और छिपाया ज्यादा। पेश हैं बातचीत के कुछ अंश ...
-’अजीब दास्तां है ये’ सीरियल में अलग क्या होगा?
यह सीरियल नहीं, हमारी और आपकी कहानी है। आत्मनिर्भर होने की जद्दोजहद में एक महिला की जिंदगी किन समस्याओं और चुनौतियों से गुजरती है, इसमें सशक्त रूप से दिखाया गया है। सीरियल के प्रसारण से पहले इसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकता।
-सोनाली बेंद्रे के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
मैं क्या, हर शख्स सोनाली की अदाकारी और खूबसूरती का फैन है। उनकी शख्सियत में गंभीरता के साथ-साथ चुलबुलापन भी है। फिल्मी जगत की नामी हस्ती होने के बावजूद वह बहुत सरल और सहज हैं। मैं खुशकिस्मत हूं कि
उनके साथ काम करने का मौका मिला।
-आपने टीवी की दुनिया में अच्छी पहचान कायम की थी। फिर अचानक मौजूदगी कम क्यों हो गई?
मैं शौक के लिए एक्टिंग करता हूं। जब महसूस हुआ कि अब ब्रेक लेना चाहिए, तो आराम किया। मेरा मकसद डायरेक्शन है। मैं बहुत जल्द इस क्षेत्र में काम शुरू करने जा रहा हूं।
-डायरेक्शन से मतलब फिल्म बनाने से है या सीरियल?
मेरे पापा ज्ञानदेव अग्निहोत्री मशहूर स्क्रिप्ट राइटर रहे हैं। उनकी जिंदगी से प्रेरणा लेकर मैं फिल्मों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं। मेरी दिली ख्वाहिश है कि जब दुनिया से रुखसत होऊं तो लोग मुझे अच्छे निर्देशक के रूप में याद करें।
- आप बिग बॉस के प्रतिभागी रहे हैं। इस सीजन के प्रतिभागियों में से कौन पसंद है?
बिग बॉस अभी शुरू हुआ है। इसे थोड़ा और आगे बढ़ने दीजिए। प्रतिभागियों को ठीक से जान लें, उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
हार मानना मैंने सीखा ही नहीं : सोनाली
-अचानक छोटे पर्दे के बारे में कैसे सोचा?
अब टीवी का दायरा सीमित नहीं रहा। यह हर घर में है और मैं भी इसके जरिए अपने दर्शकों से जुड़ना चाहती थी। हालांकि रिएलिटी शो के माध्यम से मैंने पहले ही टीवी की दुनिया में कदम रख लिया था लेकिन धारावाहिक के बारे में अब सोचना शुरू किया।
-एकता कपूर परिवार का हिस्सा कैसे बनीं?
एकता का ये धारावाहिक महिलाओं को सशक्त रूप में दिखाएगा। इसलिए इसका कांसेप्ट मुझे बेहतरीन लगा। मैंने शोभा का किरदार निभाया है जो हर पल घर-परिवार और समाज की चुनौतियों से लड़ती है।
-चर्चा है आपने हर एपिसोड के लिए चार लाख रुपये फीस ली है?
मैं साइनिंग अमाउंट पर ज्यादा ध्यान नहीं देती। मेरा मकसद किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना है।
-आपकी कोई एक बात जो ‘शोभा’ से मेल खाती हो?
कोई एक बात नहीं, बहुत सी चीजें शोभा से मिलती हैं। मैं भी शोभा की तरह जुझारू हूं और किसी भी सूरत में हार नहीं मानती। हम दोनों में एक ही फर्क है और वो ये कि शोभा को कॉफी पसंद नहीं और मैं कॉफी की दीवानी हूं।