केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने यूटी के चार इंस्पेक्टरों की डीएसपी पद पर प्रमोट करने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने यूटी प्रशासन और पुलिस को आदेश दिए हैं कि वह तीन महीने में याचिकाकर्ताओं की प्रमोशन पर फै सला लें। साथ ही कहा है कि फैसले के दो सप्ताह बाद तक डेपुटेशन पर कोई डीएसपी की पोस्ट न भरी जाए।
इससे पहले यूटी प्रशासन की ओर से केस की पैरवी कर रहे सरकारी वकील अरविंद मौदगिल ने कहा कि याचिका में गलत तथ्य सामने रखे थे कि डीएसपी पद पर पैनल गठित कर बाहर से नाम मंगवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यूटी प्रशासन या पुलिस ने न तो कोई पैनल गठित किया है और न ही कोई नाम मंगाए हैं। उन्होंने कहा कि याचिका दायर करने वाले इंस्पेक्टरों की प्रमोशन की मांग विचाराधीन है।
याचिकाकर्ताओं इंस्पेक्टर उदयपाल सिंह रावत, जसविंदर सिंह, अमराव सिंह और दिलशेर चंदेल ने पैनल मंगवाने के गलत तथ्य पेश कर कैट को गुमराह किया और डेपुटेशन पर डीएसपी की ज्वाइनिंग पर स्टे लिया था। बता दें कि बीते 20 मई को कैट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसमें केंद्र सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन, गृह सचिव व आईजी तेजिंद्र सिंह लूथरा को पार्टी बनाया गया था। साथ ही ट्रिब्यूनल ने याचिका पर बाहर से डीएसपी के आने पर 2 जून तक रोक लगाने के आदेश दिए थे।
वहीं याचिका में मांग की गई थी कि प्रतिवादी पक्ष को आदेश दिए जाए कि यूटी पुलिस के योग्य इंस्पेक्टरों को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) के खाली पदों (वर्तमान में 4) के लिए उन पर पंजाब पुलिस सर्विस नियमों के तहत विचार किया जाए। रिक्रूटमेंट रूल का उल्लंघन कर डेपुटेशन के जरिए डीएसपी का पद न भरा जाए। सर्विस रूल्स का हवाला देते हुए कहा गया कि डीएसपी पद के लिए 80 प्रतिशत प्रमोशन और 20 प्रतिशत सीधी नियुक्ति होनी चाहिए।
डीएसपी की पोस्ट के प्रमोशन के लिए 6 साल तक इंस्पेक्टर पद पर रहने की न्यूनतम योग्यता है। जिन इंस्पेक्टरों ने याचिका दायर की थी उन्हें इंस्पेक्टर बने छह साल से ज्यादा का समय हो चुका है। रिक्रू टमेंट रूल्स में कहीं भी डेपुटेशन से डीएसपी का पद भरने का प्रावधान नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने विभाग की ओर से 2013 में जारी सीनियॉरिटी लिस्ट की जानकारी देते हुए डीएसपी पद के लिए खुद की दावेदारी पेश की थी।