फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहादत को सलाम करने 23 को पहुंचे बाल भवन

Mon, 16 Dec 2013 04:28 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल बिक्रमजीत सिंह को मरणोपरांत स्वामी विवेकानंद स्टेट अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।
विज्ञापन


28 दिसंबर को सेक्टर 23 स्थित बाल भवन में आयोजित स्वामी विवेकानंद अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान दिया जाएगा।

इसके लिए उनके पिता रिटायर्ड मेजर परमजीत सिंह और मां लवप्रीत सिंह को विशेष तौर पर आमंत्रित किया जा रहा है। शहर के बिक्रमजीत सिंह 26 सितंबर को जम्मू के सांबा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे।

प्रणया मीडिया की ओर से ये सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के फील्ड जनरल मैनेजर केके तनेजा, इंडियन बैंक के जोनल मैनेजर आजाद सिंह, पंजाब चीफ आर्किटेक्ट सपना, चंडीगढ़ केमिस्ट एसोसिएशन के आयोजक सचिव दीपक बत्तरा और बिजनेसमैन त्रिलोकनाथ गोयल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे।
विज्ञापन


कार्यक्रम के प्रोजेक्ट हेड और प्रणया मीडिया के संचालक संजीव राणा ने बताया कि कार्यक्रम में चंडीगढ़ व पंजाब के ऐसे लोगों को सम्मानित किया जा रहा है जिन्होंने समाज सेवा, कला-संस्कृति, शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में सराहनीय काम किए हैं।

मां के मैसेज से शुरू होता था दिन
बिक्रमजीत सिंह की मां लवप्रीत कौर ने कहा कि अपने बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व महसूस होता है, लेकिन हर पल उन्हें अपने इकलौते बेटे की कमी महसूस होती है।

उनके मैसेज से ही बेटे का दिन शुरू होता था। जिस दिन बेटा शहीद हुआ, उस दिन भी उन्होंने सुबह उसे मैसेज किया था। इस पुरस्कार के लिए चुने जाने पर बिक्रमजीत सिंह के माता-पिता ने काफी खुशी भी जताई।

ये भी होंगे सम्मानित
1. अभिमन्यु सेखों
निशक्त होने के बावजूद अभिमन्यु में गजब की कला है। उनकी पेंटिंग देखकर हर किसी का मन मोहित हो जाता है। अभी पिछले महीने ही सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में अभिमन्यु की पेंटिंग प्रदर्शनी लगी थी, जिसे लोगों ने काफी सराहा भी था।
विज्ञापन


सतिंदर शर्मा
इनको बिजनेस कैटेगिरी में सम्मानित किया जा रहा है। शर्मा पिछले कई सालों से इंडियन हैंडीक्राफ्ट बनाने का काम करते हैं।

उनके बनाए हुए हैंडीक्राफ्ट न सिर्फ देश में लोकप्रिय हैं बल्कि उनकी विदेशों में भी खूब मांग है। सुखना लेक पर चलने वाले शिकारे की कारीगरी में भी इन्हीं का योगदान है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें