चंडीगढ़ में कुत्तों की समस्या से पूरा शहर दुखी है लेकिन लाखों- करोड़ों खर्च करने के बाद स्थिति में सुधार नहीं आया है। कई सेक्टरों में कुत्तों का आतंक इस कदर है कि लोगों ने सुबह सैर करने, मंदिर जाना बंद कर दिया है। निगम के अधिकारी कई बार कह चुके हैं कि समस्या का समाधान नसबंदी है। आरटीआई के आंकड़े बताते हैं कि नगर निगम उसमें भी गंभीर नहीं है। पूरे एक साल में किसी सेक्टर में दो तो किसी में पांच कुत्तों की ही नसबंदी हुई है।
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आरटीआई के आंकड़ों के अनुसार शहर के अधिकतर सेक्टरों में साल भर में 50 से कम कुत्तों की नसबंदी हुई है। मेयर अनूप गुप्ता का सेक्टर, जिसमें पिछले महीने कुत्तों के कई काटने के केस सामने आए, वहां एक जुलाई 2022 से 30 जून 2023 के बीच सिर्फ 24 कुत्तों की नसबंदी हुई है। हर महीने औसतन दो। लोगों का कहना है कि इससे ज्यादा तो कुत्तों के काटने के केस आ चुके हैं। वीवीआईपी सेक्टरों में कुत्तों की नसबंदी की संख्या कम है, जबकि गांव व कालोनियों में ज्यादा है। मनीमाजरा में सबसे ज्यादा 375 कुत्तों की नसबंदी हुई है। रोजाना औसतन एक। इसके अलावा मलोया, धनास, मौलीजागरां, डड्डूमाजरा, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1, दड़वा, बुड़ैल में 100 से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी हुई है। सेक्टर-3, 10, 53 ऐसे हैं जहां पूरे साल में सिर्फ दो कुत्तों की नसबंदी हुई है। वहीं कुल 16 सेक्टर ऐसे हैं, जिनमें पूरे साल में 10 से कम कुत्तों की नसबंदी हुई है।
प्रशासक को पत्र- डॉग बाइट के लिए निगम की तय हो जिम्मेदारी, मिले मुआवजा
कंज्यूमर प्रोटेक्शन काउंसिल के पूर्व सदस्य अजय जग्गा ने प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित और सलाहकार धर्मपाल को पत्र लिखा है। कहा है कि कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं से लोगों का जीवन नरक जैसा हो गया है। सिद्ध हो गया है कि जब तक किसी को जवाबदेह नहीं बनाया जाएगा, स्थिति नहीं सुधरेगी। शहर को स्ट्रे डॉग्स से मुक्त रखना नगर निगम की जिम्मेदारी है और यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो कुत्ते के काटने या मौत के मामलों में मुआवजे का भुगतान करने के लिए निगम को जिम्मेदार बनाना चाहिए।
जग्गा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 2010 में "कोर्ट ऑन इट्स मोशन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य" नामक एक मामले में नगर निगम को कुत्ते के काटने पर एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। उन्होंने सुझाया है कि चंडीगढ़ में डॉग बाइट पर 50,000 रुपये और काटने से मृत्यु पर 10 लाख का मुआवजा निगम द्वारा दिया जाना चाहिए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा है कि लोग एमसी को टैक्स देते हैं, एमसी के अधिकारियों की आपराधिक लापरवाही के कारण मरने के लिए नहीं। बता दें कि पार्षद हरप्रीत कौर भी सदन में मांग कर चुकी हैं कि स्ट्रे डॉग के काटने पर नगर निगम को मुआवजा देना चाहिए।
सदन में गूंजा था मामला, पार्षद बोलीं- ये चंडीगढ़ पर काला धब्बा
पिछली सदन की बैठक में पार्षद हरप्रीत कौर बबला ने काफी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सेक्टर-28 में जहां शहर के मेयर, पूर्व केंद्रीय मंत्री रहते हैं, वहीं सबसे ज्यादा कुत्तों के काटने के केस आ रहे हैं। एक महीने में चार-पांच केस आए हैं। नगर निगम व एमओएच भले कह रहे हैं कि वह काफी प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ये सच नहीं है। कोई गंभीर नहीं है। उदाहरण देते हुए बताया कि उनके वार्ड में कुत्तों को पकड़ने आई टीम का नेट फटा हुआ था, जिसमें से कुत्ता निकल कर भाग गया। पूरे शहर में लोग कुत्तों से परेशान हैं। डिस्पेंसरी में इसके लिए इंजेक्शन नहीं है। अगर होता भी है तो कहा जाता है कि दो और केस आ जाएं, उसके बाद टीका लगेगा। ये कैसा मजाक है। ये स्मार्ट सिटी पर काला धब्बा है। कहा कि सेक्टर-28ए की आरडब्ल्यूए की तरफ से उन्हें एक ज्ञापन आया, जिसमें लोग कह रहे हैं कि सात बजे के बाद उनके इलाके में कर्फ्यू लग जाता है। कुत्तों का इतना आतंक फैल गया है कि लोग बाहर निकलने से डरते हैं।
सबसे कम नसबंदी वाले 10 इलाके
सेक्टर/इलाके -- कुत्तों की नसबंदी की संख्या
3 2
10 2
53 2
4 3
33 3
63 3
रायपुर खुर्द 3
9 4
16 4
48 4
सबसे ज्यादा नसबंदी वाले 10 इलाके
सेक्टर/इलाके -- कुत्तों की नसबंदी की संख्या
मनीमाजरा 375
मलोया 282
धनास 163
मौलीजागरां 131
इंडस्ट्रियल एरिया फेज 1 115
डड्डूमाजरा 114
सेक्टर-45, बुड़ैल 105
दड़वा 102
खुड्डाअलीशेर 83
सेक्टर-47 80
(नोटः एक जुलाई 2022 से 30 जून 2023 के आंकड़े)
15 अगस्त के बाद रायपुर कलां में बन रहे नए एबीसी सेंटर का उद्घाटन होगा। इसके बाद कुत्तों की नसबंदी की क्षमता में तीन गुना तक की वृद्धि होगी। उम्मीद उससे स्थिति में काफी सुधार आएगा।
- अनूप गुप्ता, मेयर