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निजी स्कूलों पर मेहरबान विभाग, 13 मई तक तैयार नहीं होगी रिपोर्ट!

Fri, 13 May 2016 01:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एडमिशन - फोटो : demo pics
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शहर के प्राइवेट स्कूलों द्वारा निजी पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस में लगवाने, कैंपस में बुकशॉप में महंगी किताबें और ड्रेस बेचने के मामले में चंडीगढ़ का शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूलों पर मेहरबान दिख रहा है। 13 मई को प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ आई शिकायतों की रिपोर्ट में अभी और देर हो सकती है। विभाग के अधिकारी अब शिकायतें आने और कमेटी द्वारा और समय मांगे जाने के बहाने बना रहे हैं। असल में विभाग प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बैकफुट पर दिख रहा है।
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गौरतलब है कि प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों की शिकायतों पर कार्रवाई के नाम पर अब तक शिक्षा विभाग ने सिर्फ कमेटी गठित की है। साथ ही फीस को कंट्रोल करने के लिए यूटी प्रशासन द्वारा तैयार पॉलिसी भी सिर्फ दिखावा मात्र ही है। प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर अब तक अधिकारियों की कार्रवाई सिर्फ कोरा दिखावा लग रहा है। 
 
एक से दो हफ्ते का लग सकता है समय अमर उजाला में प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों को महंगी किताबें खरीदने को मजबूर करने की खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग ने 2 मई को सभी प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल और प्रबंधकों के साथ मीटिंग बुलाई थी। सेक्टर-19 गवर्नमेंट स्कूल में हुई बैठक के बाद डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन रूबिंदरजीत सिंह बराड़ ने सभी शिकायतों की रिपोर्ट 13 मई तक तैयार करने की घोषणा की थी, लेकिन वीरवार को उन्होंने कहा कि अभी जांच रिपोर्ट तैयार करने में एक से दो हफ्ते का समय लग सकता है। 
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नई फीस पॉलिसी के खिलाफ सोमवार को कोर्ट जाने की तैयारी शिक्षा विभाग की ओर से प्रशासक के पास भेजी गई नई फीस पॉलिसी में कई कमियां हैं, इस मुद्दे को लेकर एडवोकेट पंकज चांदगोठिया सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करेंगे। चांदगोठिया के अनुसार यूटी प्रशासन द्वारा बनाई जा रही पॉलिसी पूरी तरह एक दिखावा है। उन्होंने कहा कि यूटी प्रशासन अगर सही मायनों में प्राइवेट स्कूलों पर लगाम कसना चाहता है तो उसे दिल्ली स्कूल एजुेकशन एक्ट-1973 को लागू करना चाहिए। एडवोकेट के अनुसार यूटी प्रशासन कोई पुख्ता एक्ट नहीं, सिर्फ दिखावे को एक पॉलिसी बना रहा है। एक्ट बनवाने के लिए प्रशासन को इसे पार्लियामेंट में इसे पारित करवाना होगा।
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फीस पॉलिसी के खिलाफ इंडिपेंडेंट स्कूलों की मीटिंग आज

मीटिंग - फोटो : demo pics
यूटी प्रशासन द्वारा प्राइवेट स्कूलों पर लगाम कसने के लिए तैयार की गई नई फीस पॉलिसी के खिलाफ प्राइवेट स्कूलों ने भी मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन ने यूटी प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होने का फैसला किया है। शुक्रवार को एसोसिएशन ने सभी प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों की मीटिंग बुलाई है।   

डीएसई को प्राइवेट स्कूलों का जवाब, हमें भी एडेड स्कूल बना दो
दो मई को डीएसई रूबिंदरजीत सिंह बराड़ ने 14 प्राइवेट स्कूलों प्रबंधकों की एक टीम बनाई थी। वीरवार को कमेटी की सेक्टर-9 स्थित डीएसई दफ्तर में पहली बैठक हुई। फीस पॉलिसी को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस भी हुई। प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों ने तो डीएसई को उनके स्कूलों को भी एडेड बनाने तक का ऑफर कर दिया। प्राइवेट स्कूलों ने आरोप लगाया कि पिछले 35 वर्षों में भी शिक्षा विभाग नया एडेड स्कूल नहीं बना सका है। 
 
रूबिंदरजीत सिंह बराड़ ,डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन चंडीगढ़ ने बताया कि सभी शिकायतों की रिपोर्ट तैयार करने में अभी हफ्ते भर का अतिरिक्त समय लग सकता है। 13 मई तक रिपोर्ट नहीं मिल सकेगी। इस संबंध में सोमवार को मीटिंग की जाएगी। जांच कमेटी एक से दो हफ्ते का जो भी वक्त मांगेगी, उसे दिया जाएगा। 31 मई तक हर हाल में रिपोर्ट पर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। 

नितिन गोयल, प्रेसिडेंट चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन ने बताया कि प्रशासन को प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर तैयार की जा रही पॉलिसी को बेहतर तरीके से तैयार करना चाहिए। मौजूदा पॉलिसी से प्राइवेट स्कूलों पर किसी तरह की रोक लगा पाना मुमकिन नहीं दिखता।
 
एचएस मामिक, चेयरपर्सन इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन चंडीगढ़ ने बताया कि यूटी प्रशासन सिर्फ 150 लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों में 70 हजार अभिभावकों की कोई बात नहीं सुनी जा रही। फीस पॉलिसी अभी प्रशासन ने हमें दिखाई नहीं है। पॉलिसी को देखकर ही कुछ कमेंट करूंगा।
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