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निजी स्कूल बंद, संचालक अड़े, सरकार से पैसा न मिला तो नहीं पढ़ाएंगे

Wed, 11 May 2016 10:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक/चंडीगढ़।
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हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों का विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में सोमवार को लगातार तीसरे दिन निजी स्कूल बंद रहे। कई जिलों में तो हड़ताल का चौथा दिन है। जींद में डीएवी स्कूल को छोड़कर अन्य सभी जिलों में निजी स्कूलों पर ताले लटके रहे। इससे जहां अभिभावकों में रोष हैं, वहीं निजी स्कूल संगठन बिना पैसे लिए किसी भी बच्चे को नहीं पढ़ाने की हठ पर कायम है। इस क्रम में सोमवार को तीन संघों ने चंडीगढ़ में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर निजी स्कूलों के संचालन में आ रही समस्याएं हल करने की मांग की। 
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फेडरेशन आफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा, हरियाणा यूनाइटेड स्कूल एसोसिएशन के विजेंद्र मान और हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कांफ्रेंस के संरक्षक अजमेर सिंह ने राजभवन से लौटने के बाद प्रैस कांफ्रेंस में आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार गरीब बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि नियम 134 ए केवल हरियाणा में ही लागू है, जबकि पूरे देश में गरीबों की शिक्षा के लिए आरटीई का नियम लागू किया गया है। हरियाणा में आरटीई केवल पहली कक्षा के लिए है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल आरटीई के तहत पहली कक्षा में एक भी दाखिला नहीं हो सका क्योंकि प्रदेश सरकार ने इसमें भी सरकारी स्कूल को प्राथमिकता की शर्त लगा दी। कुलभूषण शर्मा ने कहा कि बीते तीन साल से प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों को गरीब बच्चों की पढ़ाई के एवज में एक पैसा भी नहीं दिया है। ऐसे में अब निजी स्कूल मुफ्त में बच्चों को नहीं पढ़ा सकते। या तो सरकार प्रति बच्चा 2500 रुपये महीना दे या फिर स्कूल ही बंद कर दिए जाएंगे।
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सरकार पढ़ाना ही नहीं चाहती
विजेंद्र मान ने कहा कि दरअसल सरकार गरीब बच्चों को पढ़ाना ही नहीं चाहती। अब 134ए में गरीबों को लिए दो शर्तें बन गई हैं। एक- वह निर्धन वर्ग से संबंधित हो और दूसरे मेधावी भी हो। मान ने कहा कि आरटीई में प्रावधान है कि गरीब बच्चों का किसी तरह का टेस्ट नहीं लिया जाएगा लेकिन हरियाणा सरकार ने 134 ए बनाकर आरटीई के नियमों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि दाखिले के लिए टेस्ट गरीब बच्चों से भद्दा मजाक है। अजमेर सिंह ने कहा कि सरकार नए-नए बहाने बनाकर गरीब बच्चों का दाखिला रोकते हुए निजी स्कूलों को बदनाम कर रही है कि निजी स्कूल दाखिलों को खिलाफ हैं। 
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कंज्यूमर कोर्ट में जाने के चेतावनी

निजी स्कूलों के खिलाफ प्रदर्शन - फोटो : amarujala
नियम 134-ए के विरोध में निजी स्कूलों की हड़ताल के चलते जिले में अभिभावकों को ट्यूशन फीस के रूप में ही साढ़े सात करोड़ रुपये का झटका लगा है। इसके अलावा, विद्यार्थियों का ट्रांसपोर्टेशन खर्च अलग है, उसके आंकड़े भी करोड़ो में हैं। अभिभावकों ने कंज्यूमर कोर्ट जाकर छुट्टियों के दिनों की फीस वापस लेने की बात कही है। अभिभावकों का कहना है कि न केवल हड़ताल से आर्थिक बल्कि बच्चों को शैक्षणिक व मानसिक नुकसान भी हुआ है।

पानीपत में अभिभावकों ने खोला मोर्चा
पानीपत। हरियाणा अभिभावक मोर्चा स्कूल खुलवाने को लेकर लामबंद हो गया है। हरियाणा अभिभावक मोर्चा ने सोमवार को सीटीएम को ज्ञापन सौंपकर सरकार व स्कूल संचालकों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराकर बच्चों की पढ़ाई बहाल कराए जाने की मांग की है। मोर्चा के प्रदेश संयोजक एडवोकेट दीपक कथूरिया ने कहा कि स्कूल प्रबंधन हड़ताल पर जाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। फीस देकर पढ़ने वाले बच्चों का इसमें क्या दोष है। नियम 134 ए के मुद्दे पर उनके बच्चे क्यों नुकसान उठाए।

गरीब बच्चों को दाखिला न देने के लिए बंद किए निजी स्कूल
चंडीगढ़। नियम 134ए के तहत गरीब बच्चों के दाखिले में बने गतिरोध पर दो जमा पांच मुद्दे जनआंदोलन ने आरोप लगाया है कि निजी स्कूल मालिकों ने केवल इसलिए स्कूल बंद किए हैं ताकि गरीब बच्चों को दाखिला न दिया जा सके। सोमवार को एक बयान में जनआंदोलन के अध्यक्ष सत्यवीर हुड्डा ने कहा कि निजी स्कूलों की हड़ताल का कोई औचित्य नहीं है। जहां तक गरीब बच्चों की पढ़ाई के खर्च का प्रश्न है, निजी स्कूल मालिकों ने खुद ही पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर किया हुआ है, जिसकी अगली सुनवाई 25 मई को होनी है। हुड्डा ने कहा कि जब मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन है तो स्कूल बंद करने या हड़ताल करने का कोई औचित्य नहीं बनता। हुड्डा ने कहा कि वे मंगलवार को शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा और सीएम के ओएसडी राजेश खुल्लर के मिलेंगे।
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