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निजी नंबर प्लेट और बिना लाइसेंस के चल रहीं कई कंपनियां, एसटीए से शिकायत

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चंडीगढ़। शहर में कई एग्रीगेटर कंपनियां मनमर्जी पर उतर आई हैं। ये कंपनियां निजी नंबर प्लेट व टेंपरेरी नंबर प्लेट की गाड़ियों को भी कैब व बाइक टैक्सी चलाने की अनुमति दे रही हैं। शहर में ओला-उबर के अलावा अन्य किसी (इन-ड्राइवर, रैपिडो, ब्ला-ब्ला) कंपनी के पास लाइसेंस नहीं है। फिर भी ये कंपनियां बिना किसी रोक-टोक के शहर में काम कर रही हैं। इसकी ट्राइसिटी कैब-ऑटो यूनाइटेड फ्रंट ने स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) को शिकायत दी है।
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प्रतिनिधिमंडल में विक्रम पुंधीर, सोमवीर तोशाम, संदीप राणा, संदीप कुमार, मुकेश राजपूत, केशव, गुरदेव सिंह, अनुज राणा और मनिंदर सिंह शामिल रहे। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा गया है कि इन कंपनियों के पास लाइसेंस नहीं है, इसलिए प्रशासन को टैक्स नहीं देती हैं। ये लोगों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है, क्योंकि इन-ड्राइवर एप को लेकर एसटीए जनसूचना भी जारी कर चुका है कि वह इनमें सफर न करें, क्योंकि वह सुरक्षित नहीं हैं। शहर में बाइक टैक्सी का चलन काफी ज्यादा बढ़ गया है। रैपिडो एप मोटरसाइकिल मालिकों को टैक्सी के रूप में उपयोग करने की अनुमति देता है जबकि नियमों के अनुसार यह अवैध है, क्योंकि सफेद नंबर प्लेट के वाहन को टैक्सी के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है। यूनियन ने मांग की है कि ऐसी कंपनियों पर लगाम लगाई जाए, क्योंकि इन सब की वजह से कैब चालक, लोगों व प्रशासन को भी नुकसान हो रहा है। कहा है कि सरकार ने प्रति किमी किराया तय किया है, लेकिन ये कंपनियां अपनी मर्जी का किराया वसूलती हैं। शिकायत की कॉपी को प्रशासक के सलाहकार समेत अन्य अधिकारियों और पंचकूला के आरटीओ, मोहाली के आरटीओ को भी भेजी गई है।
निजी नंबरों की गाड़ियों पर चल रही टैक्सियां
शिकायत में कहा गया है कि ओला, उबर व अन्य कंपनियों ने कॉमर्शियल गाड़ियों के साथ कई निजी गाड़ियों व टेंपरेरी नंबरों को भी कैब चलाने की मंजूरी दी हुई है जबकि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा- 66 (1) के तहत परमिट उसी वाहन को मिलता है, जिसका व्यावसायिक श्रेणी में आरटीओ में पंजीकृत हो। ऐसे में निजी नंबर के वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता लेकिन फिर भी कंपनियां मनमाने तरीके से इन्हें कैब चलाने की अनुमति दे रही हैं। अगर इन निजी नंबर की कैब बाइक की दुर्घटना हो जाए तो पीड़ित को इंश्योरेंस क्लेम भी नहीं मिलेगा। शिकायत में कहा गया है कि अगर निजी नंबरों पर टैक्सी चलते देखना है तो ट्रिब्यून, हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट, सिंहपुरा चौक (जीरकपुर) में आसानी से देखा जा सकता है।
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कार्रवाई हो भी तो कैसे?
शहर में करीब सात हजार ऑटो हैं। पंजाब-हरियाणा से भी औसतन रोजाना चार-पांच हजार से ज्यादा ऑटो आते हैं। करीब 4 हजार टैक्सी व कैब चलती हैं। 1200 के करीब स्कूल बस हैं। सीटीयू की बसें, ट्रांसपोर्ट ट्रक, छोटे सामान ढोने वाली गाड़ियां, होम डिलीवरी करने वाली गाड़ियां समेत अन्य को मिलाकर शहर में कुल करीब 20 हजार व्यावसायिक गाड़ियां हैं लेकिन इन पर नजर रखने के लिए और चालान काटने के लिए सिर्फ एक मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) है इसलिए शहर में कंपनियों की मनमानी ऐसे ही चल रही है।
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