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निजी बस संचालकों की मनमर्जी: चंडीगढ़ में समानांतर चला रहे अपना बस स्टैंड, प्रशासन को लग रहा लाखों का चूना

Tue, 15 Nov 2022 05:22 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

बस सेवा में निजी कंपनियों की दखलअंदाजी इस कदर हावी हो चुकी है कि आईएसबीटी-43 के सामने सड़क पार करने के बाद उन्होंने अपना बस स्टैंड बनाया हुआ है। यहां लगभग हर समय निजी कंपनियों की बसें खड़ी रहती हैं और सैकड़ों की संख्या में सवारी भी वहां मौजूद रहती है।
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सेक्टर 45 में खड़ी प्राइवेट बसें। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ में निजी बसों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं लेकिन स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी हाथ पर हाथ धरे बैठा है। इनकी नाकामी की वजह से चंडीगढ़ प्रशासन को रोजाना लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ये निजी बस कंपनियां अब सरकारी बस स्टैंड के पास अब अपना समानांतर बस स्टैंड चला रहे हैं। यहां से रोजाना हजारों यात्रियों से मनमाना किराया वसूल कर दिल्ली, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में पहुंचा रहे हैं।

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एक समय था जब शहर में चालान और जब्त होने के डर से कोई भी निजी बस दाखिल नहीं होती थी क्योंकि प्रशासन ने शहर के अंदर इन बसों के संचालन पर रोक लगाई हुई है। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अफसरों की लापरवाही और मिलीभगत की वजह से अब निजी बस संचालक न सिर्फ शहर के अंदर से बसें पंजाब, हरियाणा, यूपी-बिहार के लिए लेकर जा रहे हैं, बल्कि कई जगह दफ्तर खोल कर बैठे हैं और प्रशासन की जमीनों को बस स्टैंड बना लिया है। 

सेक्टर-44, 45, धनास, फैदां, कजहेड़ी, मनीमाजरा, विकास नगर समेत कई इलाकों में निजी बसें खड़ी रहती हैं और सवारियों को ढो रही हैं, लेकिन प्रशासन के अफसरों ने आंखें मूंद रखी हैं। स्थिति इस कदर खराब हो चुकी है कि सेक्टर-45 के रेहड़ी मार्केट के पास हर समय कई निजी बसें खड़ी रहती हैं और वो सीटीयू, हरियाणा रोडवेज आदि की तरह चंडीगढ़ से हरदोई, लखनऊ के लिए बसें चला रहे हैं। 
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आईएसबीटी-43 के सामने सड़क पार निजी कंपनियों का बस स्टैंड
बस सेवा में निजी कंपनियों की दखलअंदाजी इस कदर हावी हो चुकी है कि आईएसबीटी-43 के सामने सड़क पार करने के बाद उन्होंने अपना बस स्टैंड बनाया हुआ है। यहां लगभग हर समय निजी कंपनियों की बसें खड़ी रहती हैं और सैकड़ों की संख्या में सवारी भी वहां मौजूद रहती है। कजहेड़ी से जो सड़क मोहाली की तरफ जाती हैं, वहां बसें खड़ी रहती हैं। बस कंपनियों ने कजहेड़ी में दफ्तर खोले हुए हैं। आईएसबीटी-17 के सामने सेक्टर-22 में भी कई बस कंपनियों ने अब दफ्तर खोल लिए हैं। गांव फैदां निजामपुर के बीट बॉक्स के पास कई निजी बसें खड़ी रहती हैं जो राजस्थान व अन्य राज्यों में पंजीकृत है। ये उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के कई जिलों के लिए चलती है। कुछ हफ्तों पहले प्रशासन के परिवहन सचिव से भी इसकी शिकायत की गई थी। 

कोविड से जब ट्रेनें थीं बंद, तब भी काफी सक्रिय थे निजी बस संचालक
कोविड के दौरान जब ट्रेनें बंद कर दी गई थीं या यात्रियों की संख्या को सीमित कर दिया गया था, तब भी शहर के विभिन्न गांव और कॉलोनियों में यह बस संचालक सक्रिय थे। धनास, फैदां, इंडस्ट्रियल एरिया, मनीमाजरा समेत कई इलाकों में निजी बसें खड़ी होती थीं, जहां से लोगों को बसों में बैठाया जाता था। ये सामान्य किराए ये पांच गुना ज्यादा तक दाम लोगों से वसूलते थे और उत्तर प्रदेश व बिहार के विभिन्न जिलों के लिए टिकट बुक करते थे। कई बार ऐसे मामले सामने आए, जिसमें एक सीट पर दो लोग और सवारियों को ले जाकर आधे रास्ते में ही छोड़ दिया गया।

निजी बसों से ये है प्रशासन और जनता का नुकसान

  • इन बसों के पास टूरिस्ट परमिट लेकिन राज्य सरकार की बसों की तरह स्टेज कैरिज परमिट की तर्ज पर बसों को सवारी ढोने के लिए इस्तेमाल करते हैं
  • ऐसा करके ये भारी टैक्स की चोरी करते हैं, जिससे प्रशासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है
  • किराया पर प्रशासन का कोई कंट्रोल नहीं, वे मनमर्जी के होते हैं
  • ये बसें स्टैंडर्ड के अनुसार नहीं होती
  • इनमें सुरक्षा के पूरे उपकरण नहीं होते
  • सीजन के सम एक सीट पर दो-दो लोगों को बैठने पर मजबूर किया जाता है
  • कई बार लोगों को जिस जगह पहुंचाने का वादा किया जाता है, वहां न ले जाकर रास्ते में उतार दिया जाता है

कार्रवाई को तेज करेंगे
पार्किंग में खड़ी बसों का चालान नहीं किया जा सकता है। जब ये बसें सड़क पर सवारियों को उतारती या चढ़ाती हैं तो उस समय इन्हें पकड़कर चालान और जब्त करने की कार्रवाई की जाती है। हमने पिछले दिनों में कई निजी बसों का चालान किया है। कई बसें जब्त भी की हैं। इसके बावजूद अगर कुछ बसें ऑपरेट हो रही हैं तो उन पर की जाने वाली कार्रवाई को तेज करेंगे। - अमित कुमार, एसटीए

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