पंजाब में मुक्तसर जिले के मलोट में 11 को होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसान कल्याण रैली शिरोमणि अकाली दल के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। इसे कामयाब बनाने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। पीएम मोदी ने पिछले सप्ताह फसलों के एमएसपी में एतिहासिक बढ़ोतरी का बड़ा चुनावी एलान किया था। उसके बाद यह पहली रैली होगी, जिसमें मोदी सीधे किसानों से रूबरू होंगे। रैली का प्रभाव ज्यादा से ज्यादा इलाकों तक पहुंचे, इसी को देखते हुए मलोट को चुना गया है।
राजस्थान और हरियाणा सीमा पास होने के कारण वहां के किसान भी इसमें आएंगे। सिरसा और आसपास के क्षेत्रों और गंगानगर व हनुमानगढ़ के किसानों को रैली में लाया जाएगा। रैली किसानों के मुद्दे पर है, जोकि भाजपा नहीं, बल्कि अकाली दल का परंपरागत वोट बैंक है। रैली स्थल मलोट को बादल परिवार और अकाली दल का गढ़ माना जाता है। इसके अलावा केंद्र में बेशक भाजपा काबिज हो, लेकिन पंजाब में सीनियर पार्टनर शिअद ही है। इसलिए रैली के आयोजन की कमान अकाली दल के हाथ में है, भाजपा सहयोगी भूमिका में रहेगी। शिअद सुप्रीमो सुखबीर बादल ने खुद इसकी कमान संभाल रखी है। पार्टी ने मालवा के छह जिलों से एक लाख लोग जुटाने का लक्ष्य रखा है। पंडाल में 35 हजार कुर्सियां लगाई जा रही हैं।
भाजपा ने लगाया पूरा जोर
प्रधानमंत्री की रैली के लिए स्वाभाविक तौर पर भाजपा ने भी पूरा जोर लगा दिया है। प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक ने सोमवार को मलोट जाकर रैली की तैयारियों का जायजा लिया। बाद में आसपास के जिलों के प्रभारियों के साथ बैठक की। भाजपा ने रैली के लिए अपने सभी 33 संगठनात्मक जिलों से वर्कर बुलाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन बठिंडा शहरी व देहाती, मानसा, फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, बरनाला और संगरूर से ज्यादा बसें लाने को कहा गया है। सभी प्रभारी सोमवार को अपने जिलों में पहुंच गए। रैली के लिए दिल्ली मुख्यालय से झंडे व अन्य प्रचार सामग्री आ चुकी है। पार्टी का मानना है कि अगर दूरदराज के जिलों से वर्कर रैली में न भी पहुंच सके तो पार्टी केझंडे लगे वाहन सड़कों पर दिखने से भी प्रभाव पड़ेगा।
पार्किंग की समस्या
रैली के दौरान वाहनों की पार्किंग की समस्या आ रही है। मलोट दाना मंडी केकाफी दूर तक कोई ऐसी जगह नहीं है जहां पार्किंग करवाई जा सके। इसे देखते हुए सोमवार को ही वहां बंद पड़ीं मिलें और शेलर की सफाई शुरू कर दी गई थी। ताकि करीब पांच बसें व गाड़ियां खड़ी करने का प्रबंध किया जा सके। प्रधानमंत्री की सिक्योरिटी ने भी रैली स्थल पर कमान संभाल ली है। पीएम की सुरक्षा पहले से ज्यादा कड़ी होगी।