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भाई-बहन के प्यार पर महंगाई का असर: कच्चे माल की कीमतें बढ़ीं, राखियों के दाम दोगुने

Thu, 05 Aug 2021 02:29 PM IST
निवेदिता वर्मा मोनिका नागर, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

दुकानदारों का कहना है कि पहले की अपेक्षा इस बार राखियां मंहगी हैं। पहले एक राखी की कीमत 10 से 15 रुपये तक होती थी, जो ग्राहकों को 20 से 25 रुपये तक मिल जाती थी। अब वही राखी 25 रुपये तक पड़ रही है, इसलिए मार्केट में 40 रुपये तक इसके दाम हैं।
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चंडीगढ़ के बाजार में लगी राखियां। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना के चलते राखियों की मांग घटी है, वहीं कच्चे माल की कीमतों में 10 रुपये तक की वृद्धि हो गई है। इससे राखियों के दाम बढ़ गए हैं। पेट्रो पदार्थों की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बढ़ा है। इस बार दोगुने दाम पर राखियां मिल रहीं हैं। चंडीगढ़ में मार्केट में इस समय 150 से ज्यादा प्रकार की राखियां आ गई हैं। हालांकि कोरोना की घटती संक्रमण दर से दुकानदारों को मुनाफे की उम्मीद है। 

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इस बार रक्षाबंधन का त्योहार 22 अगस्त को है। नई उम्मीदों के साथ राखियों की खरीदारी के लिए बाजार गुलजार हो चुके हैं। सेक्टर-15 पटेल मार्केट, सेक्टर-19 सदर बाजार, सेक्टर-22 शास्त्री मार्केट, सेक्टर-21 मार्केट और सेक्टर 41 कृष्णा मार्केट में जगह-जगह राखियों के स्टॉल लग चुके हैं। दो साल से कोरोना की मार झेल रहे दुकानदारों को इस बार अच्छे मुनाफे की उम्मीद है। 


दुकानदारों का कहना है कि पहले की अपेक्षा इस बार राखियां मंहगी हैं। पहले एक राखी की कीमत 10 से 15 रुपये तक होती थी, जो ग्राहकों को 20 से 25 रुपये तक मिल जाती थी। अब वही राखी 25 रुपये तक पड़ रही है, इसलिए मार्केट में 40 रुपये तक इसके दाम हैं। बाजार में चंदन, रुद्राक्ष और ब्रेस्लेट राखी की हमेशा मांग रहती है। इस समय भाई भाभी स्पेशल राखी काफी प्रचलन में है।

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पिछले साल राखियां बच गईं, रुपये फंस गए

दुकानदारों ने बताया कि वह हर बार दिल्ली, अंबाला, लुधियाना, गुजरात से 70 हजार रुपये से एक लाख रुपये की राखियां मंगवाते हैं। पिछले साल कोरोना के कारण काफी माल बच गया था। इस कारण रुपये फंस गए। इस बार माल कम मंगाया है, ताकि सभी राखियां बिक जाएं। राखियों की कीमत 20 से 500 रुपये तक है। हर साल लगभग पचास हजार रुपये की कमाई हो जाती थी। इस बार बीस हजार रुपये तक कमाई की उम्मीद है।

डिजाइन तय करती है राखी की कीमत
सेक्टर-19 के दुकानदार रामबाबू ने बताया कि एक बॉक्स में 12 राखियां होती हैं। एक थैले में लगभग दो हजार राखियां होती हैं। हर विक्रेता कम से कम पांच थैले तो जरूर लाता है। राखी के डिजाइन के अनुसार ही हर थैले की कीमत होती है। पिछले साल नुकसान होने के कारण इस बार विक्रेता ग्राहकों की पसंद के अनुसार चुनिंदा राखियां लेकर आए हैं। अनुमान है कि एक व्यक्ति कम से कम पचास हजार रुपये की राखी लेकर तो जाएगा।
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पिछले साल लगी मायूसी हाथ

ग्राहकों की पंसद के अनुसार एक महीने पहले ही दिल्ली और लुधियाना से राखियां मंगवाई हैं। राखियां खरीदने तो अभी कम ग्राहक आ रहे हैं, लेकिन फिर भी इस बार अच्छी कमाई की उम्मीद है। पिछले साल तो मायूसी के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा था। कोरोना से पहले के ग्राहकों की तुलना में 40 प्रतिशत ग्राहक ही आ रहे हैं। -वसीम खान, राखी विक्रेता

बीते दस दिनों में बिकीं 100 राखियां
पिछले साल राखी का कारोबार ठप ही रहा। पूरा परिवार यहीं पर रहता है, इसलिए पिछले साल सब्जी बेचकर परिवार का गुजर-बसर किया, लेकिन इस बार बीते दस दिनों में लगभग सौ राखियां बिक गई हैं। केरल में बढ़ते मामलों को देखकर लोगों के दिल में तीसरी लहर का भी डर है. इसलिए भी लोग पहले ही राखियां खरीद रहे हैं। -रवि सक्सेना, राखी विक्रेता

बीस हजार तक मुनाफे की उम्मीद 
इस बार राखी के त्योहार से काफी उम्मीद है। पूरा परिवार यूपी में रहता है। पिछले साल काम बिल्कुल ठप रहा। इसलिए अपने गांव वापस चला गया था। वहीं, जाकर थोड़ी बहुत खेती की। इस बार बीस हजार रुपये तक के मुनाफे की उम्मीद है, क्योंकि पिछली बार लोग त्योहार ठीक प्रकार नहीं मना पाए थे। -श्याम, राखी विक्रेता

नए डिजाइन से ग्राहकों के आकर्षित होने की उम्मीद 
पिछले लगभग 15 साल से राखी बेच रहा हूं। इस बार नई डिजाइन की राखी मंगवाई हैं। उम्मीद है ग्राहकों को पसंद आएंगी। लोगों के उत्साह को देखकर लग रहा है कि अच्छी बिक्री होगी। कुछ राखियां बाहर से मंगवाई हैं, कुछ यहीं पर बनाई गई हैं। हर बार कम से कम 25 हजार मुनाफा हो जाता था। -रिंकू, राखी विक्रेता
 
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