चंडीगढ़। इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर न सिर्फ फर्नेस इंडस्ट्री (औद्योगिक भट्टी उद्योग) पर पड़ेगा बल्कि इससे जुड़े अन्य उद्योगों पर भी पड़ेगा। उत्पादन लागत (प्रोडक्शन कॉस्ट) बढ़ने के कारण बाथ फिटिंग, ट्रैक्टर पार्ट्स और स्टील उत्पादों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इससे आने वाले दिनों में आम उपभोक्ता की जेब पर भी भार पड़ना तय है।
फर्नेस इंडस्ट्री पर दोहरी मार
इंडस्ट्रियल डीजल का सबसे ज्यादा उपयोग फर्नेस इंडस्ट्री में भट्ठियों को गर्म करने के लिए किया जाता है। डीजल के दाम बढ़ते ही फर्नेस चलाना महंगा हो गया है। पंचकूला के उद्योगपति और ट्रैक्टर इंडस्ट्री से जुड़े सीबी गोयल ने बताया कि फर्नेस इंडस्ट्री से लगभग सभी प्रमुख उद्योग जुड़े हैं। चाहे वह स्क्रू इंडस्ट्री हो, बाथ फिटिंग हो या फर्नीचर, हर जगह स्टील और लोहे का प्रयोग होता है। ऐसे में डीजल की बढ़ी कीमतें अप्रत्यक्ष रूप से इन सभी उद्योगों के कच्चे माल को महंगा कर देंगी।
धीरे-धीरे दिखेगा असर, बढ़ेंगे दाम
चंडीगढ़ के उद्यमी नवीन मंगलानी के अनुसार, स्टील का उपयोग करने वाली हर इंडस्ट्री इन बढ़ी हुई कीमतों से सीधे प्रभावित होगी। इसका असर रातों-रात भले न दिखे, लेकिन धीरे-धीरे बाजार में उत्पादों के दाम बढ़ने शुरू हो जाएंगे। नट-बोल्ट से लेकर ट्रैक्टर और कारों के पार्ट्स तक में लोहे का इस्तेमाल होता है, जिसके चलते ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी महंगाई की दस्तक सुनाई देने लगी है।
रोलिंग मिल्स पर सबसे गहरा असर
इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों का सबसे गहरा और तत्काल प्रभाव स्टील रोलिंग मिल्स पर देखने को मिल रहा है। उद्यमियों का कहना है कि यदि कीमतों को नियंत्रित नहीं किया गया या कोई राहत नहीं मिली, तो उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता पर बुरा असर पड़ेगा।
इन पर पड़ेगा सीधा प्रभाव
बाथ फिटिंग: नल, शावर और पाइप फिटिंग के दाम बढ़ सकते हैं।
ऑटो पार्ट्स: ट्रैक्टर और कारों के कलपुर्जे महंगे होने की संभावना है
कंस्ट्रक्शन मैटेरियल: स्टील रोलिंग मिल्स पर असर पड़ने से सरिया और लोहे के अन्य उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी।
हार्डवेयर: स्क्रू, नट-बोल्ट और फर्नीचर में इस्तेमाल होने वाला स्टील भी महंगा होगा।