डॉलर की बढ़ती कीमत ने आयातकों की चिंता बढ़ा दी है। आयातक अपना घाटा पूरा करने के लिए सामान को महंगा कर रहे हैं, जिसका असर आम जनजीवन पर हो रहा है। जहां आयातकों को झटका लगा है, वहीं आयात घटता जा रहा है। हालात ये हैं कि अकेले लुधियाना में ड्राईपोर्ट में 10 हजार कंटेनर आ रहे हैं, जिसमें अधिकतर चाईनीज माल है। ये सामान महंगा होने जा रहा है। क्योंकि चाईनीज माल का लेनदेन अमेरिकन डॉलर से होता है।
अकेले स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में क्रिकेट व हॉकी को छोड़कर सारा सामान चीन से आयात होता है। फुटबाल हो या फिर स्पोर्ट्स शूज या शटल कॉक सारा सामान चीन से ही भारत आता है, जिस पर ट्रेडर्स अपना मार्का लगाकर भारतीय बाजार में खपा रहे हैं। स्पोर्ट्स फोरम के प्रधान रविंदर धीर का कहना है कि स्पोर्ट्स इंडस्ट्री का सारा दारोमदार चीन पर है। ऐसे में डॉलर महंगा होने से हर वस्तु का दाम करीब 5 फीसदी बढ़ गया है। आयातकों ने आर्डर तो दे रखे हैं, लेकिन अगर कच्चा माल या तैयार माल ही भारतीय मुद्रा में महंगा पड़ेगा तो आयातक अपनी जेब से नहीं डाल सकता।
खर्च बढ़ेगा तो ग्राहकों से ही वसूला जाएगा
टूल के आयातक चेतन कालड़ा का कहना है कि हैंड टूल से पाइप फिटिंग तक के कारोबार में कई वस्तुएं आयात की जाती हैं। डॉलर पहले 68 रुपये था लेकिन अब 71 तक पहुंच चुका है। ऐसे में अगर हमारा खर्च बढ़ेगा तो यह ग्राहकों से ही वसूला जाएगा। रुपये के कमजोर होने का असर आयात पर होता ही है। भारत में वैसे ही व्यापार काफी मंदी के दौर में है और आयातकों पर काफी नकारात्मक असर हो रहा है।
डॉलर की बढ़ती कीमत ने किया निराश
सांकेतिक चित्र
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लुधियाना ड्राइपोर्ट पर सर्विस प्रोवाइडर कंपनी सीपी वर्ल्ड के मैनेजर पुनीत अग्रवाल का कहना है कि अभी लुधियाना में प्रति माह 10 हजार कंटेनर आ रहे हैं। अब डॉलर की बढ़ती कीमत ने आयातकों को निराश किया है। आयात कम होने की संभावना है, क्योंकि भारतीय मार्केट में महंगा माल कोई नहीं खरीदेगा। जिम का सारा सामान आयात होता है, साइकिल से लेकर ट्रेडमिल व तमाम मशीनें ताइवान व कोरिया से आती हैं। सारा माल महंगा हो गया है और आयातक हाथ पीछे खींच रहे हैं।
आयातक बुरे फंसे आर्डर देकर
प्रसिद्ध मोबाइल एसेसरी कंपनी ब्रैंकों के एमडी अतुल जैन का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स, मोबाइल एसेसरी समेत काफी सामान चीन से आयात होता है। अब सामान महंगा होने लगा है, हर सामान के दाम 10 फीसदी बढ़ते जा रहे हैं। मार्केट खराब होने लगी है, क्योंकि रिटेल दुकानदार महंगा माल खरीदने के लिए तैयार नहीं है। चीन से सारा माल अमेरिकन डॉलर के हिसाब से मिल रहा है।
हम अदा तो अमेरिकन डॉलर कर रहे हैं, लेकिन बेच भारतीय मुद्रा में रहे हैं। आगे दीपावली का सीजन है और व्यापारियों ने काफी आर्डर दे रखे हैं, अब आयातक न तो आर्डर कैंसल कर सकते हैं और न ही अपना कारोबार बंद कर सकते हैं।