पंजाब पुलिस द्वारा 24 घंटे से भी कम समय में लुधियाना ब्लास्ट कांड को सुलझाने का दावा करते हुए डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने कहा कि इस घटना के पीछे नारकोटिक्स, आतंक और विदेशी नशा तस्करों के गठजोड़ का हाथ है। कोर्ट परिसर में बम लगाते समय मारे गए व्यक्ति की पहचान गगनदीप सिंह (31) निवासी खन्ना के रूप में की हुई है, जो पंजाब पुलिस में कांस्टेबल के तौर पर भर्ती हुआ था। उसके कब्जे से 385 ग्राम हेरोइन बरामद होने के बाद उसे अगस्त, 2019 में बर्खास्त कर दिया गया था।
गुरुवार को लुधियाना के जिला कोर्ट परिसर के सार्वजनिक शौचालय में बड़ा धमाका हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 6 अन्य घायल हो गए थे। यह धमाका इतना जबरदस्त था कि सार्वजनिक शौचालय को काफी नुकसान पहुंचा और इमारत की कई खिड़कियों के शीशे भी चकनाचूर हो गए। इस घटना के पीछे पाकिस्तान आधारित खालिस्तान समर्थकों से संबंध के बारे में डीजीपी ने कहा कि पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। प्राथमिक जांच से पता लगा है कि गगनदीप के जेल में बंद खालिस्तान समर्थक तत्वों से संबंध हो सकते हैं, जिन्होंने राज्य की शांति भंग करने के इरादे से कोर्ट परिसर को निशाना बनाने के लिए गगनदीप का इस्तेमाल किया। डीजीपी ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को फील्ड अधिकारियों के साथ भी बैठक की और उनको राज्य में किसी भी अन्य आतंकवादी हमले को रोकने के लिए पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
डीजीपी ने बताया कि गगनदीप सिंह थाना सदर खन्ना में मुंशी के तौर पर काम करता था, जिस दौरान उसे हेरोइन समेत काबू किया गया। तब थाना एसटीएफ मोहाली में एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसकी अभी सुनवाई चल रही है। उस मामले में लुधियाना जेल में दो साल बिताने के बाद वह सितंबर, 2021 में जमानत पर रिहा हो गया था और उसे 24 दिसंबर, जिस दिन वह बम प्लांट कर रहा था, को फिर अदालत में पेश होना था। प्राथमिक जांच में पता चला है कि गगनदीप अदालत में दहशत पैदा करना चाहता था।
डीजीपी ने कहा कि धमाके में आरडीएक्स के इस्तेमाल की आशंका है, लेकिन अब इस बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि नमूने फोरेंसिक लैब को भेजे गए हैं। एनएसजी की एक टीम और राज्य के फोरेंसिक विशेषज्ञों को धमाके के बाद की जांच के लिए बुलाया गया है। धमाके वाली जगह पर मलबे को योजनाबद्ध ढंग से हटाने के दौरान फोरेंसिक टीम ने कुछ महत्वपूर्ण सुराग जैसे नष्ट हुआ मोबाइल सेट और मृतक के शरीर के जले हुए कपड़ों के अलावा कई अन्य सुबूत इकट्ठा किए हैं। बम प्लांट करने का काम अकेले गगनदीप ने ही किया, लेकिन उस समयावधि के दौरान कुछ संदिग्ध लोग भी सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।