सूरजकुंड मेला प्राधिकरण और हरियाणा पर्यटन द्वारा केंद्रीय पर्यटन, कपड़ा, संस्कृति, विदेश मंत्रालय और हरियाणा सरकार के सहयोग से संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह शिल्प मेला पूरे भारत के हजारों शिल्पकारों को अपनी कला और उत्पादों को व्यापक रूप से पर्यटकों को दिखाने में मदद करता है।
इस वर्ष सूरजकुंड मेला प्राधिकरण और ब्रिटिश काउंसिल के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और सूरजकुंड मेला पहली बार इंग्लैंड के कलाकारों और शिल्पकारों की मेजबानी करेगा। इसके अलावा 30 से अधिक देश इस मेले का हिस्सा होंगे, जिसमें उज्बेकिस्तान ,नेपाल, अफगानिस्तान, न्यूजीलैंड, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान, ट्यूनीशिया, जिम्बाब्वे, बुरूंडी, सेनेगल, जाम्बिया, कोमोरोस, तुर्की, मिस्र, सीरिया, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, श्रीलंका, अर्जेंटीना, नाइजर, ताजिकिस्तान ,बांग्लादेश, लेबनान, घाना, सेशेल्स, इथियोपिया, मोरक्को, फिलिस्तीन, भूटान, युगांडा, आर्मेनिया, मालदीव, सूडान, केन्या और लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो भी शामिल है।
मंत्री ने बताया कि थीम-स्टेट हिमाचल प्रदेश इस मेला में विभिन्न शिल्प और हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी अनूठी संस्कृति और समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करेगा। हिमाचल प्रदेश के सैकड़ों कलाकार विभिन्न लोक कलाओं और नृत्यों का प्रदर्शन करेंगे। पारंपरिक नृत्यों और कला रूपों से लेकर व्यंजनों तक इस साल के मेले का मुख्य आकर्षण होंगे।