पंजाब-हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़ की गांधी स्मारक निधि को भंग करने की सिफारिश करते हुए इसके अध्यक्ष के के शारदा ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने केंद्रीय संगठन गांधी स्मारक निधि राजघाट को पत्र लिख कर चंडीगढ़ स्थित निधि की वर्तमान कार्यकारणी को भंग करते हुए नई व्यवस्था की सिफारिश की है।
केके शारदा इस संगठन के पिछले चार वर्षों से अध्यक्ष थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बिना वेतन संगठन को अपनी सेवाएं दी। उनके कार्यकाल में चंडीगढ़ गांधी स्मारक भवन ने कई विकास कार्य किए व संगठन को क्षितिज तक पहुंचाया। बता दें कि उन्हीं के कार्यकाल में भवन के प्रांगण में गांधी प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन प्रशासक व पंजाब के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने किया था। इसके अतिरिक्त दिल्ली के बाद दूसरा गांधी म्यूजियम बनाया, जिसका उद्घघाटन प्रशासक व पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने किया।
शारदा के कार्यकाल में पुस्तकालय, नेचुरल पेथी के कोर्स को ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया। केके शारदा ने अपना करिअर 1965 में पत्रकारिता से शुरू किया था। जीवन भर खादी मूवमेंट से जुड़े रहे। वे आचार्य विनोबा भावे की संस्था आचार्यकुल के अध्यक्ष और चंडीगढ़ स्वतंत्रता सेनानी संगठन और खादी संस्थान के अध्यक्ष भी हैं। उनके चार वर्ष के कार्यकाल में गांधी भवन जीवंत रहा और क्षेत्र की बड़ी सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा ।