मूर्तिकार ने बताया कि गणेश की मूर्ति के साथ शिवजी, डमरू वाले, मूसक की सवारी और तबले वाले गणेश जी सहित अन्य प्रकार की मूर्तियां बनाई जा रही हैं। इस बार 450 से अधिक लोगों ने बुकिंग कराई है। अब भी लोग ऑर्डर दे रहे हैं। कुल्लू, मनाली, मानसा, डेराबस्सी, मोहाली के अलावा पंचकूला और ढकोली व जीरकपुर से ऑर्डर मिले हैं।
गणेशोत्सव की शुरुआत 19 सितंबर से होगी। इसे लेकर चंडीगढ़ में तैयारियां जोरों पर है। ऑर्डर मिलने के बाद कारीगर मूर्तियों को आकार दे रहे हैं। सेक्टर-47 स्थित बैकुंठ धाम में गणेश जी की एक फीट से लेकर 10 फीट तक की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं। सभी इको फ्रेंडली हैं।
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कारीगरों का कहना है कि पंजाब की मिट्टी से काया और गंगीटी यानी गंगा की मिट्टी से फेशियल करके गणपति महाराज मूर्ति के रूप में खड़े किए जा रहे हैं। मूर्तिकार शुभाशीष का कहना है कि गंगाजी की मिट्टी चिकनी होती है। इससे मूर्तियों के चेहरे पर चमक बढ़ती है। इस पर रंग बेहतर तरीके से चढ़ता है।
450 से अधिक लोगों ने करवाई बुकिंग
उन्होंने बताया कि गणेश की मूर्ति के साथ शिवजी, डमरू वाले, मूसक की सवारी और तबले वाले गणेश जी सहित अन्य प्रकार की मूर्तियां बनाई जा रही हैं। इस बार 450 से अधिक लोगों ने बुकिंग कराई है। अब भी लोग ऑर्डर दे रहे हैं। कुल्लू, मनाली, मानसा, डेराबस्सी, मोहाली के अलावा पंचकूला और ढकोली व जीरकपुर से ऑर्डर मिले हैं। एक फीट से लेकर 10 फीट ऊंचाई की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।
19 सितंबर से होगी गणेशोत्सव की शुरुआत
मूर्तिकार शुभाशीष ने बताया कि 19 सितंबर से गणेशोत्सव की शुरुआत की जा रही है। इसलिए मूर्तियां बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। दूर-दराज के लोग मूर्तियां पहले ही ले जाते हैं। स्थानीय लोग एक दिन पहले या गणेशोत्सव के दिन मूर्तियां घरों में ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब के डेराबस्सी और बनूड़ से मिट्टी लाई गई है, जबकि कोलकाता से गंगाजी की मिट्टी लाई गई है।