चंडीगढ़। शहर में अवैध रूप से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा जमाने वाले वेंडरों पर सख्ती बढ़ने वाली है। नगर निगम ने जुर्माने की राशि को ढाई गुना तक बढ़ाने और बार-बार नियम तोड़ने वालों के सामान की नीलामी करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा डे मार्केट लगाने वालों की फीस भी दोगुनी करने की योजना है। यह अहम प्रस्ताव 17 फरवरी को होने वाली नगर निगम सदन की बैठक में पेश किया जाएगा।
निगम का कहना है कि वर्तमान में अतिक्रमण पर लगने वाला जुर्माना बहुत कम है, जिससे दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर बार-बार अतिक्रमण करने से बाज नहीं आते। अभी तक 2000 रुपये का जुर्माना लिया जाता था जो प्रभावी साबित नहीं हो रहा था। इसलिए अब नियमों को और कड़ा करने की जरूरत महसूस की गई है। आखिरी बार संशोधन 2019 में हुआ था। इसलिए अब पहले जुर्माने की राशि को 5500 रुपये करने का प्रस्ताव है। इसमें 5000 रुपये इंफोर्समेंट विंग की गाड़ी, लेबर व अन्य खर्चे भी जोड़े गए हैं। दूसरी बार 6000 रुपये का चालान होता और तीसरी बार में सामान ही जब्त कर लिया जाएगा। नगर निगम ने इस प्रस्ताव को 17 फरवरी को होने वाली जनरल हाउस की बैठक में मंजूरी के लिए रखा है। यदि इसे स्वीकृति मिलती है, तो चंडीगढ़ में अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हो जाएगी। अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तो चंडीगढ़ में अतिक्रमण करने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
सामान छुड़वाने के लिए अब मिलेंगे 45 दिन
निगम सामान छुड़वाने के लिए 45 दिन तक बढ़ाने का प्रस्ताव लेकर आया है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार अगर 45 दिन में भी कोई सामान छुड़वाने नहीं आया तो सामान की नीलामी कर दी जाएगी।
चालान के प्रस्तावित दाम
- पहली बार उल्लंघन पर 500 + 5000 रुपये का जुर्माना
- दूसरी बार उल्लंघन पर 500 + 5500 रुपये का जुर्माना
- तीसरी बार उल्लंघन पर सामान जब्त कर नीलामी की जाएगी
डे मार्केट की दरों में वृद्धि करने का प्रस्ताव
डे मार्केट की दरों में वृद्धि करने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्ष 2018 के बाद से दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ था, लेकिन अब इसे 100 प्रति वेंडर ब्लॉक से बढ़ाकर 200 (जीएसटी को छोड़कर) करने का सुझाव दिया गया है। वर्तमान नियम के तहत, डे मार्केट के लाइसेंस धारी को प्रत्येक बाजार के लिए 10,000 का भुगतान करना पड़ता है। लेकिन विक्रेताओं का कहना है कि वे इस राशि का भुगतान करने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि वे पहले से ही छतरी, दरी और लाइट जैसी चीजों की व्यवस्था स्वयं करते हैं।