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जाट आंदोलन के दौरान हिंसा पर प्रकाश सिंह की रिपोर्ट, जानिए दोषी कौन?

Sun, 15 May 2016 05:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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जाट हिंसा पर प्रकाश सिंह सीएम को रिपोर्ट सौंपते। - फोटो : amar ujala
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प्रकाश सिंह कमेटी ने सीएम खट्टर को सौंपी 450 पन्ने की जांच रिपोर्ट में खुलासा  जाट आरक्षण दंगा भड़काने का दोषी कौन? दरअसल रिपोर्ट में है कि हरियाणा में 90 अफसरों की नाकामी की वजह से जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान करीब 11 दिन तक आठ जिलों में हिंसा और आगजनी हुई। रोहतक से सर्वाधिक तत्कालीन 30 अफसरों के नाम उस सूची में है, जो दंगे के दौरान तमाशबीन बने रहे।
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दंगों के दौरान अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सौंप दी। यूपी और असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह ने 450 पन्नों की रिपोर्ट में 90 अफसरों के नाम सरकार को सौंपे हैं। इनमें पुलिस और प्रशासन के अफसर शामिल हैं। कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार इन अफसरों ने जानबूझकर हिंसा को रोकने में कोताही बरती।
 
अफसरों को था सरकार का डर प्रकाश सिंह के अनुसार कई पुलिस अधिकारियों ने खुद अपने बयान में माना है कि उन्होंने सख्त कार्रवाई से परहेज किया। उन्हें डर था कि अगर कार्रवाई में किसी की मौत होती है तो उनकी नौकरी खतरे में होगी। वर्ष 2010 में इसी तरह की कार्रवाई में पुलिस अधिकारी एस यादव को निलंबन की कार्रवाई झेलनी पड़ी थी। पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि जिन 90 अधिकारियों की भूमिका इस दौरान ठीक नहीं रही, उनकी गलतियों का उजागर किया गया है। इनमें से ठीक एक तिहाई उस समय रोहतक में तैनात थे। 
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कर्फ्यू और धारा-144 के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे प्रकाश सिंह के अनुसार उपद्रव प्रभावित इलाकों में कहने को तो धारा-144 और कर्फ्यू घोषित था मगर इसके तहत उपद्रवियों पर अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। कुछ अफसरों ने अपने बयान में कहा है कि वे कार्रवाई के लिए ऊपर से आदेश का इंतजार करते रहे। ऊपर से आदेश नहीं मिला, इसलिए कार्रवाई नहीं की। प्रकाश सिंह के अनुसार अफसरों का यह जवाब क्षम्य नहीं है। उनका यह जवाब बताता है कि वे पद के योग्य नहीं थे। कानून व्यवस्था बिगड़ने पर उन्हें आदेश का इंतजार करने की जरूरत नहीं थी, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभानी थी। कुछ थाना प्रभारी तो अपने थानों को छोड़कर भाग गए। ऐसा करने वालों को अगर पुलिस बल से हटा भी दिया जाए तो बड़ी सजा नहीं होगी।
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12 से 22 फरवरी तक हरियाणा के आठ जिलों में उपद्रव

सीएम मनोहर लाल खट्टर - फोटो : फाइल फोटो
12 से 22 फरवरी तक हरियाणा के आठ जिलों में उपद्रव हुए। इन दंगों की जांच के लिए हरियाणा सरकार ने 2 मार्च को प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। इस कमेटी में महानिदेशक अपराध (वर्तमान में पुलिस महानिदेशक) केपी सिंह और उच्चतर शिक्षा व अभिलेखागार एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयवर्धन को भी सहयोग देने के लिए शामिल किया गया था।

कमेटी ने प्रदेश के सभी आठ प्रभावित जिलों- रोहतक, झज्जर, जींद, हिसार, कैथल, भिवानी, सोनीपत व पानीपत का दौरा कर अपराध स्थलों का निरीक्षण किया। पीड़ितों की बात सुनी और पुलिस व नागरिक प्रशासन के अफसरों से भी पूछताछ की।  प्रकाश सिंह ने बताया कि कमेटी ने मुरथल मामले पर कोई जांच नहीं की है और आंदोलन की हिंसा में किसी षडयंत्र को भी जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया। केवल अफसरों व कर्मचारियों की भूमिका की ही जांच की गई है। रिपोर्ट में ऐसे अफसरों की पहचान की गई है जिन्होंने ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरती, आंदोलनकारियों के प्रति सहानुभूति दिखाई और उन्हें मनमानी करने दी।

ऐसे जांच की कमेटी ने 8 जिलों का दौरा किया, 2217 लोगों का पक्ष सुना, 150 वीडियो फुटेज जुटाए, 387 हलफनामों का जिक्र, 71 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपी, 450 पेज की है रिपोर्ट, 200 पेज मुख्य रिपोर्ट, 200 पेज साक्ष्य संलग्न, 40 पेज खुफिया विभाग पर

 अध्ययन कर कार्रवाई करेंगे : खट्टर
शुक्रवार को प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और जल्द से जल्द इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कमेटी ने नागरिक और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कुछ सिफारिशें की हैं। इनकी जांच की जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी।
 
प्रकाश सिंह, आईपीएस अधिकारी ने बताया कि जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी गई है। जिन अफसरों ने लापरवाही बरती उनके नाम और ब्योरा रिपोर्ट में दर्ज है। यह सरकार का अधिकार क्षेत्र है कि वह अफसरों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है।
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