कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चंडीगढ़ में पार्टी के अध्यक्ष पद पर प्रदीप छाबड़ा की कुर्सी बरकरार रख उनके विरोधियों को जोर का झटका दिया है। विरोधी खेमे के नेता इसे लेकर हाईकमान से संपर्क में थे कि छाबड़ा को फिर से अध्यक्ष नियुक्त न किया जाए।
हालांकि ऐन वक्त पर उनकी सारी कोशिशों पर पानी फिर गया। विरोधी खेमे के नेताओं में प्रमुख नाम दवेंद्र सिंह बबला और कांग्रेस उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह बढ़हेडी का है, जो पार्टी में रहकर छाबड़ा के खिलाफ अब तक मोर्चा खोलते रहे हैं। बबला इस समय कांग्रेस से मेयर पद के उम्मीदवार भी हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस के कई सीनियर नेता ऐसे हैं, जो अब भी सिर्फ दिखावे के लिए छाबड़ा के साथ हैं, लेकिन हकीकत तो यह है कि उन्हें पद से हटाने के लिए वे भी लॉबिंग में जुटे हुए थे।
हाल ही में चंडीगढ़ कांग्रेस में उस समय ज्यादा बवाल मचा था, जब पिछले माह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की दिल्ली में ताजपोशी होनी थी। तब प्रदीप छाबड़ा अकेले ही ताजपोशी के कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली गए थे। उस समय कांग्रेस पार्षद दल के नेता दवेंद्र सिंह बबला और भूपेंद्र सिंह बढ़हेड़ी ने नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल उठाया था कि दूसरे राज्यों से सैकड़ों लोग दिल्ली गए, क्या चंडीगढ़ से 100 लोग भी वहां नहीं जा सकते थे।
प्रदर्शन को फेल करने का भी हुआ प्रयास
पिछले माह 29 जनवरी को कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने सेक्टर-17 नगर निगम कार्यालय के बाहर भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन को कई सीनियर नेताओं ने फेल साबित करने का प्रयास किया। कई सीनियर नेता खुद भी गायब रहे और कार्यकर्ताओं को नहीं आने दिया गया, ताकि छाबड़ा की किरकिरी हो और उन्हें पद से हटाया जा सके।
चंडीगढ़ में साल 2015 से अध्यक्ष हैं प्रदीप छाबड़ा
- फोटो : File Photo
चंडीगढ़ में साल 2015 से अध्यक्ष हैं प्रदीप छाबड़ा
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को सभी राज्यों और यूटी के प्रदेश अध्यक्षों को कुर्सी पर बने रहने के आदेश जारी किए। इस संबंध में राष्ट्रीय महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने पत्र जारी किया है। प्रदीप छाबड़ा साल 2015 से चंडीगढ़ में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। छाबड़ा को तब पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने अध्यक्ष बनवाया था। अध्यक्ष पद का कार्यकाल वैसे तो तीन साल का होता हैं, लेकिन अब यह बात बिलकुल साफ हो गई है कि आगामी लोकसभा चुनाव तक छाबड़ा ही अध्यक्ष रहेंगे।
पिछले साल ही चंडीगढ़ कांग्रेस ने अपना संगठनात्मक चुनाव पूरा किया है। यहां 26 डेलीगेट्स का चयन किया गया है। गौरतलब है कि चंडीगढ़ कांग्रेस ने प्रदेश के नए अध्यक्ष को तय करने का फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया था। इसी बीच राहुल गांधी ने सभी अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ा दिया। अभी केवल कर्नाटक और छत्तीसगढ़ का कांग्रेस अध्यक्ष बदला गया है। यह बदलाव इसलिए है, क्योंकि आने वाले दिनों में वहां पर विधानसभा चुनाव होने हैं। जिन बाकी राज्यों में भी आगामी दिनों में विधानसभा चुनाव होंगे, वहां के अध्यक्ष भी बदले जाने की संभावना है।
सोनिया के बाद अब राहुल ने भी जताया भरोसा : प्रदीप
यह मेरी खुशकिस्मती है कि सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी ने भी उन्हें एक बार फिर अध्यक्ष पद पर दायित्व निभाने का मौका दिया। वह पूरी ईमानदारी केसाथ सभी को साथ लेकर काम करेंगे और पार्टी के आधार को पहले से ज्यादा मजबूत करेंगे।
- प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष
छाबड़ा कमजोर अध्यक्ष : बढ़हेडी
हम छाबड़ा के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी कारगुजारी से असंतुष्ट हैं। छाबड़ा के नेतृत्व में पार्टी नगर निगम सहित अब तक पांच चुनाव हार चुकी है। वे इसलिए छाबड़ा को हटाने की मांग कर रहे थे। राहुल गांधी हमारे नए राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। अभी 4 से 5 माह उन्हें समझने में लगेंगे। इसके बाद जितने भी कमजोर अध्यक्ष होंगे, उन्हें हटाया जाएगा। चंडीगढ़ के अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा भी कमजोर हैं और उन्हें भी हटाया जाएगा।
- भूपेंद्र सिंह बढ़हेड़ी, उपाध्यक्ष एवं प्रदेश कार्यकारिणी के डेलीगेट
हाईकमान केपास पूरा अधिकार : पवन
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने चंडीगढ़ कांग्रेस सहित सभी प्रदेश अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ा दिया है। हाईकमान केपास ही पूरा अधिकार है कि वह कभी भी किसी को बदल सकता है।
- पवन बंसल, पूर्व रेल मंत्री