पीजीआई में बीते 26 दिसंबर को हाईकोर्ट के आदेश पर 24 हफ्ते की गर्भवती महिला का गर्भपात किया गया। महिला की सर्जरी कर जब बच्चे को निकाला गया तब वह जिंदा था। बड़ी लापरवाही बरतते हुए डाक्टरों ने जिंदा नवजात को पोस्टमार्टम के लिए पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया।
पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने जिंदा नवजात देखकर उसे वापस वार्ड में भेजे जाने की बात कही लेकिन उनकी बात को दरकिनार कर उन्हें नवजात के मरने तक इंतजार करने को कहा गया। इस पर पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने विरोध कर दिया, उनका विरोध देखकर नवजात को वापस वार्ड में शिफ्ट किया गया। जहां 12 घंटे बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसे दोबारा पोस्टमार्टम भेजा गया।
मामला गंभीर है, उसमें हर पक्ष की बारीकी से जांच करने के बाद ही रिपोर्ट सौंपी जाएगी इसलिए थोड़ा वक्त लग रहा है। - प्रो. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता