फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: पति-पत्नी की साथ में पोस्टिंग केवल गाइडलाइन, कानूनी अधिकार नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति-पत्नी को एक ही स्थान या नजदीकी स्टेशन पर तैनाती देने से संबंधित ट्रांसफर गाइडलाइन कर्मचारी को कोई वैधानिक या प्रवर्तनीय कानूनी अधिकार प्रदान नहीं करतीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी गाइडलाइन केवल प्रशासनिक विवेक को दिशा देने के लिए होती हैं और इन्हें अनिवार्य नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन

जस्टिस संदीप मौदगिल ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के एक कांस्टेबल की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। करीब 16 वर्षों की सेवा कर चुके गुरजीत सिंह वर्ष 2021 से चंडीगढ़ स्थित पंजाब-हरियाणा सिविल सचिवालय में तैनात थे। अक्टूबर 2024 में उनका तबादला हरियाणा के हिसार जिले में स्थित राजीव गांधी थर्मल पावर प्रोजेक्ट, खेड़ार स्थित यूनिट में कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि उनका मामला केंद्र सरकार की कपल केस पॉलिसी के अंतर्गत आता है, क्योंकि उनकी पत्नी पंजाब सरकार में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं और मोहाली में तैनात हैं, जो चंडीगढ़ के पास है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीआईएसएफ महानिदेशक द्वारा उनकी अपील को केवल एक पंक्ति में नॉट एक्सीडेड लिखकर खारिज करना मनमाना और गैर-तर्कसंगत है। याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सीआईएसएफ जैसे अनुशासित और सशस्त्र बलों के प्रत्येक सदस्य को यह माना जाता है कि वह हमेशा ड्यूटी पर है और उसे देश के किसी भी हिस्से में तैनात किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि सीआईएसएफ एक अखिल भारतीय चरित्र वाली केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, जिसकी जिम्मेदारी देशभर में महत्वपूर्ण, संवेदनशील और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना है। ऐसे में दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तैनाती से इनकार को स्वीकार नहीं किया जा सकता। ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें