फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'डीयू और जेएनयू को टक्कर देने वाली पंजाब यूनिवर्सिटी को क्यों खंडहर बना रहे हो'

Thu, 21 Sep 2017 09:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
विज्ञापन
पंजाब यूनिवर्सिटी की बदहाल वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जाहिर करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि डीयू और जेएनयू को टक्कर देने वाली यूनिवर्सिटी को क्यों खंडहर बनाने पर सभी तुले हैं। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार समेत सभी को आदेश दिए हैं कि जिनकी ओर से फंड आना बाकी है वे सभी फंड रिलीज करें। साथ ही सभी पक्षों को इस पर अपना हलफनामा सौंपने के भी आदेश दिए हैं।
विज्ञापन


हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि वर्तमान में मौजूद फंड  से पीयू को चलाना मुश्किल हो गया है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि गौरवमय इतिहास वाली ऐसी यूनिवर्सिटी जो अपनी काबिलियत के दम पर डीयू और जेएनयू को टक्कर दे रही है, उसे कैसे बंद होने दिया जा सकता है। अगर स्थिति ऐसी ही रही तो यह खंडहर में तब्दील हो जाएगी। 

पंजाब सरकार आगे आकर ग्रांट में बढ़ोत्तरी करे
इससे पहले हाईकोर्ट को बताया गया था कि कई नेता पीयू के लिए आगे आए हैं ।  इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि नेता सिर्फ घोषणाएं करने भर के लिए हैं या कोई कार्रवाई भी करेंगे। घोषणाओं से पीयू की वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं होने वाला है।  पंजाब सरकार को चाहिए कि अब वो आगे आकर पीयू को दी जा रही ग्रांट में बढ़ोतरी करे। पर पंजाब सरकार है की इस मामले में कुछ भी करने को तैयार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

60 करोड़ केंद्र और 40 करोड़ पंजाब जारी कर दे तो चल सकता है काम: वीसी

VC Arun Grover On PU - फोटो : अमर उजाला
सुनवाई के दौरान कुलपति अरुण ग्रोवर ने एक फार्मूला भी सुझाया था। उनका कहना था कि अगर वित्त वर्ष के शुरू में ही केंद्र सरकार 60 करोड़ और पंजाब सरकार 40 करोड़ रुपये जारी कर दे तो पीयू इस फंड को रिजर्व के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है ताकि अगर किसी स्थिति में बाकी ग्रांट में देर होती है तो पीयू इस फंड से अपना काम चला सके।

क्योंकि फरवरी से जुलाई के महीने तक पीयू को फंड्स की बेहद जरूरत होती है। उसके बाद जुलाई में एडमीशन फीस आने से काम चल सकता है। इन महीनों में अगर रिजर्व फंड्स उपलब्ध हो तो स्थिति में सुधार हो सकता है।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें