जिला अदालत ने 600 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले में चंडीगढ़ बेस मलयेशियाई कंपनी यूनीपेय टूयू मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और यूनीगेटवे ट्रेडिंग कंपनी के डायरेक्टरों के खिलाफ भगौड़ा (पीओ) करार देने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए हैं। वहीं, इनमें से एक मलयेशिया में रह रहे डायरेक्टर मुगुनधन गंगम को गृह मंत्रालय के जरिए समन भेजने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश आरोपियों को समन जारी करने के बावजूद अदालत में पेश न होने पर दिए हैं।
इससे पहले सेशन कोर्ट ने 3 नवंबर को कंपनी के डायरेक्टरों मुगुनधन गंगम, सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी अमाल राज, राम कृष्णामूर्ति और कमल कुमार बक्शी को समन भेज 28 नवंबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे। इनमें से केवल कमल बक्शी ही पुलिस हिरासत में है, जबकि अन्य अब तक गिरफ्तार नहीं हो सके हैं। इस पर जांच एजेंसी की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपियों को समन सर्व नहीं हो पाए हैं। इसके बाद सेशन कोर्ट ने कमल कुमार बक्शी को छोड़कर अन्य सभी डायरेक्टरों को भगौड़ा करार देने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 5 अप्रैल 2018 को होगी।
ईडी दायर कर चुकी है चार्जशीट
27 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कंपनी के सभी डायरेक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। दो हजार पेज की चार्जशीट में ईडी ने कंपनी के डायरेक्टरों के खिलाफ मनी लांड्रिंग अधिनियम 45 के तहत उन्हें आरोपी बनाया है। इनके खिलाफ केस में सौ के करीब गवाह बनाए गई हैं। डायरेक्टरों में मुगुनधन गंगम, सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी, अमाल राज, राम कृष्णामूर्ति और कमल कुमार बक्शी के नाम शामिल हैं। इनमें से केवल कमल बक्शी ही गिरफ्तार हैं। ईडी ने आरोपियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट 2002 के अधिनियम 3, 4 के तहत भी आरोप पत्र दायर किया था।
यह है मामला
गिरफ्तार
- फोटो : gettty
गुरुग्राम से पकड़ा गया था बक्शी
ईडी ने 29 जुलाई 2017 को पोंजी घोटाले की जांच के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में रेड की थी। इस दौरान कंपनी का एजेंट और चंडीगढ़ निवासी कमल बक्शी जो सेक्टर-36 थाना पुलिस में दर्ज एक मामले में भगौड़ा है, उसे गुरुग्राम से पकड़ा था। वह इस घोटाले में भी आरोपी है। उसके खिलाफ पानीपत और गुरदासपुर में भी केस दर्ज हैं। ईडी ने रेड के बाद आरोपी की 4.18 करोड़ रुपये की संपत्ति भी सीज की थी। वहीं, ईडी के अनुसार इस घोटाले का मास्टरमाइंड मलयेशिया निवासी मुगुनधन गंगम है और वह वहीं छिपा हुआ है।
यह है मामला
चंडीगढ़ बेस मलयेशियाई कंपनी यूनीपेय टूयू मार्केटिंग प्राइवेंट लिमिटेड और यूनीगेटवे ट्रेडिंग कंपनी एक तय फीस के बाद ऑनलाइन सदस्य बनाती थी। कंपनी उन्हें डिजिटल वॉलेट की सुविधा उपलब्ध करवाती थी। कंपनी में देशभर से हजारों लोगों ने करोड़ों रुपया लगाया था। शुरुआत में कंपनी ने लोगों को बहुत मोटा रिटर्न दिया। इससे लोगों का विश्वास कंपनी में बढ़ा तो उन्होंने और पैसा लगाया। कंपनी ने अक्तूबर 2010 में निवेशकों को महीने के महीने मिलने वाले रिटर्न को देना बंद कर दिया था। इससे निवेशकों से 600 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।