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ऐसा सिर्फ चंडीगढ़ में ही, नो पार्किंग में गाड़ी पार्क की तो जुर्माना 3500 रु!

Thu, 14 Dec 2017 09:25 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ पार्किंग - फोटो : File Photo
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नो पार्किंग में वाहन पार्क करने वालों का जुर्माना 500 रुपये ही है, लेकिन नगर निगम की ओर से कार चालक से जो 3500 रुपये का जुर्माना लिया जा रहा है, उसमें तीन हजार रुपये अकेले रिमूवल चार्जेस के हैं।
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ट्रैफिक पुलिस की ओर से नो पार्किंग में पार्क होने वाले वाहनों से रिमूवल चार्जेस लिए जाते हैं, वह मात्र 300 रुपये है। 3500 रुपये नो पार्किंग में वाहन पार्क करने का जुर्माना पूरे देश में कही पर भी नहीं है। नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ दस्ते ने मंगलवार को सेक्टर-34 से 45 कारें जब्त की हैं।

नगर निगम एक्ट में प्रावधान है कि 500 रुपये से ज्यादा का जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में निगम ने रिमूवल चार्जेस के नाम पर जुर्माना बढ़ा दिया है। नो पार्किंग में कार उठाकर ले जाने का खर्चा भी नगर निगम को 700 रुपये पड़ रहा है। यह राशि प्रति कार के हिसाब से नगर निगम की ओर से क्रेन वाले को दिया जाता है। नगर निगम के पास अपनी कोई भी सरकारी क्रेन नहीं है, जबकि ट्रैफिक पुलिस के पास कारें उठाने केलिए अपनी क्रेन हैं।
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पूर्व कमिश्नर ने दिए थे 3500 चार्ज करने के निर्देश
पिछले साल तत्कालीन कमिश्नर बी पुरुषार्था ने अतिक्रमण हटाओ दस्ते को नो पार्किंग में पार्क होने वाली कारों को जब्त कर 3500 का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे। उस समय कमिश्नर ने कहा था कि कारें पेवर ब्लाक में पार्क होती हैं तो ब्लाक टूटते हैं। वाहनों को उठाने के लिए अलग से स्टाफ लगता है, ऐसे में जुर्माना भारी-भरकम लगना चाहिए।
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- फोटो : File Photo
यह बड़ी ही हैरानीजनक
फासवेक के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि कितनी हैरानी की बात है कि प्रशासन के दो अलग-अलग विंग एक ही कार्रवाई के लिए अलग-अलग जुर्माना चार्ज कर रहे हैं। उनका कहना है कि नगर निगम तीन हजार रुपये रिमूवल चार्जेस अलग से लगाकर लोगों को लूटने का काम कर रहा है।

ट्रैफिक पुलिस के बराबर ही नो पार्किंग में वाहन पार्क करने का 1300 रुपये जुर्माना होना चाहिए, लेकिन कार्रवाई करने से पहले नगर निगम को लाउड स्पीकर से एरिया में घोषणा करनी चाहिए। नगर निगम का काम लोगों को जागरूक करना होना चाहिए न कि जुर्माना लगाना।

बुधवार का रिलीज हुई कारों से लिया एक हजार जुर्माना
लोगों के विरोध के बाद मेयर आशा जसवाल की नाराजगी के कारण बुधवार को जो आधा दर्जन कारें रिलीज होने से रह गई थीं, उनसे एक एक हजार रुपये का जुर्माना ही लिया गया, जबकि मंगलवार को जो 35 कारें छोड़ी गईं, उनसे 3500 रुपये का जुर्माना लिया गया है। मालूम हो कि किसी का भी जुर्माना कम करने का अधिकार ज्वाइंट कमिश्नर और कमिश्नर के पास है।
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