कैंबवाला पुल के पास चो में गिर रहा गंदा पानी, पास के पत्थर भी हुए काले
एक तरफ प्रशासन की ओर से दावे किए जाते हैं कि चो में कहीं से भी गंदा पानी नहीं गिर रहा है जबकि हकीकत यह है कि सिर्फ कांसल फॉरेस्ट के गेट से कैंबवाला के पुल के बीच ही तीन जगह गंदा पानी सीधे चो में गिराया जा रहा है। कैंबवाला पुल के पास साफ देखा भी जा सकता है। गंदे पानी की वजह से आसपास के पत्थर भी काले हो चुके हैं। वहीं पर कई पेड़ भी काटकर चो के अंदर ही गिरा दिए गए हैं, जो पानी के बहाव को रोकने का काम कर रहे हैं। आगे जाते हुए चो के अंदर काफी बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले काफी समय से चो की सफाई नहीं हुई है।
सुखना चो में गिर रहे गंदे पानी से पत्थर भी काले पड़े।
लाल डोरे से बाहर खुले कई अवैध तबेले, सीवर निकासी का नहीं कोई प्रबंध
सुखना की सेहत की दृष्टि से खुड्डा अलीशेर, कैंबवाला और किशनगढ़ काफी महत्व रखते हैं। ये गांव सुखना लेक के पास हैं लेकिन पिछले 15 वर्षों में इन्हीं गांवों में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण हुए हैं। कैंबवाला में अब कई कच्चे अवैध तबेले खुल गए हैं लेकिन उनके यहां से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है।
बारिश के दिनों में वह पानी भी सुखना चो में ही जाकर मिलता है। इसे लेकर स्थानीय कृष्ण कुमार ने प्रशासन के अधिकारियों को शिकायत भी की हुई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हाल में सुखना लेक के अंदर कई मछलियां मरी हुई पाई गई थीं। कृष्ण कुमार ने ताजा शिकायत में मछलियों के कारण यहां से निकले गंदे पानी को बताया था। उन्होंने बताया कि गांव कैंबवाला से गांव झुग्गियां बेला जाने वाले रास्ते पर भी कई अवैध डेयरियां बन गई हैं। यहां का गंदा पानी रास्ते पर भी गिराया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों से मांग की है कि इसे रोका जाए।
पाइप लगाकर सुखना चो में गिराया जा रहा गंदा पानी।
जिनके पास 15 से ज्यादा गाय-भैंसे, लेनी होगी मंजूरी, नहीं तो करेंगे कार्रवाई
पर्यावरण विभाग के निदेशक देबेंद्र दलाई ने बताया कि शहर के डेयरी मालिकों के लिए हमने एक नियम बनाया है। जिनके पास भी 15 से ज्यादा गाय-भैंसे होंगी, उन्हें चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति से एक मंजूरी सर्टिफिकेट लेना होगा। ये उन्हें तब मिलेगा जब वो बताएंगे कि गाय-भैंसों के मलमूत्र का निस्तारण वो कैसे करते हैं।
विभाग ने इसके लिए बीते दिनों एक वर्कशॉप भी लगाई थी और डेयरी मालिकों को प्रशिक्षण दिया है। हमारे पास करीब 300 डेयरी मालिकों की जानकारी है, जिनके पास 15 से ज्यादा गाय भैसें हैं। इन सभी को सर्टिफिकेट के लिए सीपीसीबी के पास आवेदन करना होगा। जो ऐसा नहीं करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।