हरियाणा की सियासत में कभी किंगमेकर की भूमिका में रहे चौधरी चांदराम वर्षों तक राजनीति से दूर रहने के बाद विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही एक बार फिर सक्रिय हो गये हैं। 92 बसंत देख चुके चांदराम भारतीय समाज शक्ति पार्टी का नाम सुशासन पार्टी रख अब 90 उम्मीदवार तलाशने में जुट गये हैं।
14 सितंबर को हिसार में एक मीटिंग भी तय कर दी है। जिसमें चुनाव के लिए घोषणा पत्र और उम्मीदवारों केनाम पर गहन मंथन किया जाएगा। संयुक्त पंजाब में 1952 के पहले ही विधानसभा चुनाव में विधायक बने चांदराम ने 1957, 1962, 1967, 1968, 1972 में विधानसभा के चुनाव लड़े।
1957 को छोड़ बाकी हर चुनाव में जीत हासिल की। 1977 में जनता पार्टी केप्रदेशाध्यक्ष रहते हरियाणा में 75 सीटों पर पार्टी को जीत दिलाई। लेकिन वे सांसद का चुनाव जीत केंद्र में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर बने।
चांदराम के कहने पर देवीलाल मुख्यमंत्री बने
चांदराम कहते हैं 1977 में उनके कहने पर ही ताऊ देवीलाल को मुख्यमंत्री बनाया गया तो भजन लाल को मुख्यमंत्री बनवाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। 1983 में राज्यसभा सदस्य बने। 1990 में हरदोई से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसकेबाद 2000 में भाजपा से झज्जर सीट पर चुनाव मैदान में उतरे लेकिन जीत नहीं पाये। 2005 में कांग्रेस से हरदोई लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ लेकिन यहां हार गये।
इसके बाद राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। 2009 केबाद कांग्रेस की सदस्यता का नवीनीकरण ही नहीं कराया। कांग्रेस, लोकदल, भाजपा और फिर कांग्रेस में रहे बुजुर्ग नेता 92 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं। वे कहते हैं, विधानसभा चुनाव में वे उम्मीदवार उतारेंगे, खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। यदि पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में आई तो मुख्यमंत्री वे ही होंगे। वे 1967 में प्रदेश केउप मुख्यमंत्री भी बने थे।
हरियाणा में परिवारवाद, वंशवाद व जातिवाद
चौधरी चांदराम बताते हैं, 1966 में संयुक्त पंजाब में मंत्री रहते हरियाणा बनाने केदरमियान कागजों पर मेरे ही हस्ताक्षर हैं। कहते हैं, मेरे हस्ताक्षरों पर जो प्रदेश बना, उसे इस तरह बर्बाद होते नहीं देख सकता। यहां परिवारवाद, वंशवाद, जातिवाद व भ्रष्टाचार पनप रहा है। प्रॉपर्टी डीलर की सरकार बन रही है।
प्रदेश में 47 फीसदी लोग एससी बीसी के हैं। ऐसे में मेरे पास वोट बैंक खूब हैं। कहते हैं, अब कुलदीप बिश्नोई का बेटा भव्य बिश्नोई राजनीति में आ गया तो दुष्यंत चौटाला सांसद बन गये। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा केपिता राजनीति में रहे और अब दीपेंद्र सिंह राजनीति कर रहे हैं। आरोप लगाया कि राजनीति को इन परिवारों ने जागीर बना रखी है।
मोदी के विचार अच्छे हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केअच्छे विचार हैं। कहा था अच्छे दिन आएंगे, उसकेलिए कदम भी उठाये जा रहे हैं। लेकिन एससी बीसी के लिए कुछ नहीं कर रहे। अभी तक कहीं चर्चा तक नहीं है। कहा, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कहते हैं, मैं पहले जाट हूं, मुख्यमंत्री बाद में। जबकि उन्हें कहना यह चाहिए था कि मैं पहले हरियाणवी हूं।
मुझे राजनीति की पटरी से भजन लाल ने उतारा
चौधरी चांदराम कहते हैं कि उन्होंने भजन लाल को मुख्यमंत्री बनवाने में अहम भूमिका निभाई। 1968 में इंदिरा गांधी से सिफारिश कर आदमपुर से टिकट दिलवाई, लेकिन मेरे को राजनीतिक पटरी से उन्होंने ही उतारा। प्रदेश की राजनीति में भजन लाल के दिन जब अच्छे चल रहे थे, उस वक्त उन्हें हाशिये पर रखा गया।