लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और इस बार फिर से पंजाब की राजनीतिक बिसात में कलाकारों की एंट्री हो रही है। आप ने कलाकार कर्मजीत अनमोल को फरीदकोट संसदीय सीट से लोकसभा का टिकट दिया गया है।
पंजाब की राजनीतिक पार्टियां कलाकारों और खासतौर पर गायकों को चुनाव में उतारती रही हैं। संसदीय चुनाव ही नहीं विधानसभा चुनाव में भी कलाकारों का खासा दबदबा रहा है। भगवंत मान तो दो बार सांसद रहने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुके हैं।
कविशर करनैल सिंह पारस के बेटे बलवंत सिंह खुद भी कविशरी का गायन करते रहे हैं। मंचों पर रैलियों से पूर्व अपनी कविशरी के जरिए रंग बांधने वाले रामूवालिया ने अपनी कविशरी के माध्यम से ही राजनीति में कदम रखा और केंद्रीय मंत्री तक बने। लोक गायक मोहम्मद सद्दीक तो लंबे समय से ही कांग्रेस के साथ जुड़े हुए हैं। पहले 2012 में उन्होंने भदौड़ हलके से तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे दरबारा सिंह गुरु को हराया और बाद में फरीदकोट हलके से जीत हासिल करके लोकसभा की सीढ़ियां भी चढ़े।
सूफी गायक हंस राज हंस को शिरोमणि अकाली दल राजनीति में लाई और उन्हें जालंधर से संसदीय चुनाव भी लड़वाया गया, लेकिन वह हार गए। कुछ दिन बाद उन्होंने शिअद को अलविदा कहकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया, लेकिन यह यारी भी ज्यादा देर तक नहीं चली और वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें दिल्ली से संसदीय चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया, तो उन्हें सफलता भी मिल गई।
भाजपा ने गुरदासपुर से विनोद खन्ना को कांग्रेस की सुखबंस कौर भिंडर के खिलाफ जो लगातार लोकसभा का चुनाव जीत रहीं थीं। विनोद खन्ना ने यह चुनाव दो बार जीता। उनके बाद पार्टी ने दो बार यह सीट गंवाई, लेकिन जब एक बार फिर फिल्मी कलाकार सनी देओल को मैदान में उतारा तो पार्टी को जीत का स्वाद मिला।
गायक बलकार सिद्धू बेशक आप में रहे या कांग्रेस में उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में आप में शामिल हो गए। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बलकार सिंह सिद्धू ने रामपुरा फूल विधानसभा क्षेत्र से शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार सिकंदर सिंह मलूका और पूर्व कांग्रेस विधायक गुरप्रीत सिंह कांगड़ को हराकर जीत हासिल की। कलाकार अनमोल गगन मान ने भी पिछले विधानसभा चुनाव खरड़ से लड़े थे और वह मौजूदा समय में पंजाब की कैबिनेट मंत्री हैं।
कुछ को नहीं मिली सफलता
आम आदमी पार्टी में प्रांतीय संयोजक रहे गुरप्रीत घुग्गी ने भी आप की टिकट हासिल कर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे। उन्हें राजनीति सफलता नहीं मिली, इसलिए वह वापस अपनी दुनिया में लौट गए। बलकार सिद्दू एक नामवर पंजाबी गायक हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सिद्दू मूसेवाला भी लड़ा था, लेकिन वह हार गए था। विधायक जस्सी जसराज हों या केएस मक्खण, सतविंदर बिट्टी हों या फिर बलदीप सिंह इन्हें भी सियासत में सफलता नहीं मिली।