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वोट के लिए डेरो में नतमस्तक होंगे दिग्गज, मत्था टेकने वालों की फेहरिस्त लंबी

Sun, 08 Jan 2017 01:06 AM IST
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब विधानसभा चुनाव
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पंजाब विधानसभा चुनाव में सियासी सरगर्मियों के बीच प्रचार अभियान में जुटे नेताओं की डेरों के प्रति करीबी और बढ़ती नजर आ रही है। नेता वैसे तो प्रचार के लिए तमाम सोशल साइट्स और सूचना तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन डोर टु डोर अभियान के तहत वे डेरों के साथ नजदीकियां रखकर आगे बढ़ रहे हैं। 
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माना जा रहा है कि प्रचार के तमाम माध्यमों के प्रयोग के इतर डेरों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। मतलब यह है कि किसी भी डेरे का समर्थन मिलना, यानी एक साथ हजारों वोटरों का साथ।

विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू होने से पहले ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी, कैप्टन अमरिंदर, सुखबीर बादल सहित अन्य दलों के नेता भी डेरों में मत्था टेक चुके हैं। 
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चुनावी दंगल के आगे बढ़ने के साथ-साथ पंजाब की सियासत डेरों के इर्द-गिर्द धूम रही है। चुनाव में पार्टियों का एजेंडा और वोटरों को लुभाने की तमाम कोशिशों के बावजूद डेरों पर सभी दलों की निगाह है।

डेरा प्रमुखों के प्रभाव को वोट में तब्दील करने की जुगत

सुखबीर बादल - फोटो : अमर उजाला
चुनाव प्रचार में जुटी पार्टियां जीत दर्ज करने के लिए डेरों की तरफ रुख कर रही हैं। वजह यह है कि इन डेरों के प्रति वोटरों की आस्था और विश्वास कायम है। नेताओं के इस रुख से जाहिर है कि यह डेरे जाति आधारित राजनीति का भी आधार बन सकते हैं।

वोटरों में डेरा प्रमुखों के प्रभाव को देखते हुए पार्टियों की कोशिश है कि किसी प्रकार डेरों से समर्थन हासिल किया जाए, ताकि एक साथ हजारों या लाखों वोटरों को अपने पक्ष में किया जा सके। 

32 फीसदी वोट पर है दलों की नजर : 
पंजाब विधानसभा के चुनाव को देखते हुए सियासी पार्टियों की कोशिश है कि दलित वोटरों का समर्थन कैसे हासिल किया जाए। वर्षों से सामाजिक भेदभाव के शिकार रहे इस वर्ग को डेरों ने तवज्जो दी।

इसके अलावा डेरों की तरफ संचालित सामाजिक गतिविधियों और बुनियादी स्वास्थ्य, शिक्षा की सुविधाओं ने भी दलितों के एक बड़े हिस्से को अपनी तरफ आकर्षित किया। ऐसे में पंजाब चुनाव में दलित वोटरों को अपने पक्ष में करने वाली पार्टियों को सीधे तौर पर फायदा मि
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कई नेता कर रहे हैं डेरों का दौरा

कैप्टन अमरिंदर
प्रमुख दलों में कांटे की टक्कर की उम्मीद 
पंजाब विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र के प्रो. आशुतोष की मानें तो पंजाब विधानसभा चुनाव में हार-जीत के प्रति जातिगत समीकरण भी बनेंगे। चुनाव में प्रमुख पार्टियों के बीच इस बार की लड़ाई काफी करीबी होगी। 

ऐसे में पार्टियों की कोशिश है कि जो भी वोट उनकी झोली में गिर सकें, उसे हासिल करने में कोई चूक न रह जाए। जो भी दल बड़े डेरों का समर्थन हासिल करने में कामयाब होते हैं, इसका फायदा उन्हें विधानसभा चुनाव में जरूर मिलेगा।

कई नेता कर रहे हैं डेरों का दौर -
- अरविंद केजरीवाल ने पिछले साल मार्च माह में डेरा सचखंड बाला का दौरा किया था। 
- राहुल गांधी, सुखबीर बादल, कैप्टन अमरिंदर, सोनिया गांधी भी पिछले वर्ष राधा स्वामी सत्संग, ब्यास के दौरे पर आए थे।
- डेरा सच्चा सौदा, डेरा रूमी वाला, डेरा हंसाली वाले, निरंकारी मिशन, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान सहित पंजाब-हरियाणा में 300 से अधिक डेरे हैं।  
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