चंडीगढ़। नौकरी न मिलने पर वीरवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आवास पर मेडल लौटाने जा रहे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पैरा खिलाड़ियों से पुलिस ने धक्कामुक्की की और उन्हें सड़क पर घसीटा। इस बीच कई दिव्यांग खिलाड़ी चोटिल भी हो गए। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने पंजाब के अलग-अलग शहरों से आए सभी 12 पैरा एथलीट खिलाड़ियों को हिरासत में ले लिया। बाद में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुलावा भेज खिलाड़ियों के पांच सदस्यीय दल से मुलाकात की और उन्हें नौकरी देने का भरोसा दिया। इसके बाद पुलिस ने सभी पैरा खिलाड़ियों को छोड़ दिया।
पंजाब के विभिन्न शहरों से 12 पैरा एथलीट व्हीलचेयर के अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी महाराजा रणजीत सिंह अवार्डी संजीव कुमार की अगुवाई में वीरवार को चंडीगढ़ पहुंचे और अपने-अपने मेडल लौटाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री के आवास की ओर कूच किया। पैरा खिलाड़ी जब पंजाब के मुख्यमंत्री के आवास की ओर कूच कर रहे थे तब चंडीगढ़ क्लब के पास उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। यहां पर चंडीगढ़ पुलिस के अधिकारी और जवान मौजूद थे। रोकने पर सभी पैरा एथलीट यहां पर दरी बिछाकर बैठ गए और विरोध जताने लगे। कुछ समय बाद इन एथलीटों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने का प्रयास किया। इस प्रयास में उन्होंने बैरिकेड को तोड़ दिया। पुलिस ने पहले उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं माने तो उन्हें रोकने की कोशिश की गई। इसी बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। कुछ एथलीट जमीन पर गिर गए और एक दूसरे के नीचे दब गए। उन्हें कई जगह चोटें आईं। उनकी बैसाखी और जूते इधर-उधर छूट गए। नीचे गिरे एथलीटों को पुलिस ने बलपूर्वक उठाने में पूरा जोर लगा दिया।
पैरा एथलीट खिलाड़ियों को जबरदस्ती हिरासत में लेकर पुलिस सेक्टर-3 थाने ले गई। इसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री ने इन खिलाड़ियों के एक दल को मिलने का बुलावा भेजा। पैरा एथलीट संजीव के नेतृत्व में पांच खिलाड़ियों का दल मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आवास पर पहुंचा और उन्हें मांगपत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने पत्र देखने के बाद इन खिलाड़ियों को भरोसा दिलाया कि अगली कैबिनेट बैठक में पैरा ओलंपिक के खिलाड़ियों की नौकरी के मुद्दे को हल कर दिया जाएगा। इसके बाद सभी पैरा ओलंपिक के खिलाड़ियों को सेक्टर-3 थाना से छोड़ दिया गया।
चोटें आईं और टूट गए मेडल, छलके आंसू
धक्कामुक्की में वर्ल्ड पैरा ओलंपिक पावर लिफ्टिंग चैंपियन कुलदीप भी चपेट मेें आकर जमीन पर गिर पड़े। चोट लगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीते गए मेडल टूट गए। टूटे मेडलों को देखकर कुलदीप की आंखों में आंसू छलक पड़े। बोले कि कभी सोचा नहीं था कि जिन मेडलों को इतनी मेहनत से देश के लिए जीता, वह इस तरह टूटेंगे।
देश के लिए मेडल जीते, यह सुलूक शर्मनाक
इन पैरा एथलीट खिलाड़ियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर एक वाहन में बैठाया। दो महिला व्हीलेचयर नेशनल मेडलिस्ट खिलाड़ियों सीमा और सुमनदीप को पुलिस वालों ने व्हीलचेयर समेत ही उठाकर ट्रक पर चढ़ाकर हिरासत में ले लिया। सीमा और सुमनदीप ने कहा कि हम अपनी बात रखने के लिए यहां आए थे, देखो, हमारा क्या हाल किया गया है। देश के लिए मेडल जीतने वालों के साथ इस तरह का सुलूक शर्मनाक है।
पंजाब का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार भी लौटाने पहुंचे थे खिलाड़ी
खिलाड़ियों में राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के पैरा एथलीट शामिल थे, जिन्होंने विभिन्न पैरा खेलों में हिस्सा लेते हुए मेडल और ट्राफियां बटोरी हैं। पंजाब सरकार का सबसे बड़ा खेल सम्मान महाराजा रणजीत सिंह अवार्ड भी इन दिव्यांग खिलाड़ियों के पास था, जिसे वह लौटाने आए थे। यह पैरा एथलीट पंजाब सरकार से पिछले कई सालों से नौकरी की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक किसी को भी नौकरी नहीं मिली है।
दिसंबर 2019 में भी किया था प्रदर्शन, तब भी सिर्फ आश्वासन ही मिला था
पंजाब के पैरा ओलंपिक एथलीट खिलाड़ी इससे पहले भी 3 दिसंबर 2019 को पंजाब सरकार से नौकरी मांगने के लिए चंडीगढ़ आए थे। इसके बाद दो दिन सेक्टर 25 में रैली ग्राउंड में भी रहे। उस समय पंजाब सरकार की ओर से इन पैरा एथलीटों को यह आश्वासन देकर वापस भेज दिया गया था कि सरकार की ओर से जल्द ही उन्हें नौकरी दी जाएगी।