चंडीगढ़। गांव दड़वा में सोमवार शाम को दस हथियारबंद युवकों ने वाल्मीकि मंदिर के पुजारी और उनके दो अनुयायियों पर तलवारों और चाकुओं से हमला कर दिया। हमले में तीनों बुरी तरह घायल हो गए जबकि दिन में ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पुजारी को सुरक्षा न देने पर पुलिस को फटकार लगाई थी। साथ ही एसएसपी चंडीगढ़ से पूछा था कि इस मामले में आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई न करने पर क्यों न उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई की जाए लेकिन हाईकोर्ट के इस रुख के बावजूद पुलिस पुजारी की रक्षा नहीं कर पाई। उधर, हमले की सूचना पर पहुंची पुलिस घायल दड़वा निवासी पुजारी देवनाथ उर्फ देव आनंद, पिंकू और सुमित उर्फ कांचा को इलाज के लिए मनीमाजरा सिविल अस्पताल पहुंचाया।
पुजारी देवनाथ ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि सोमवार शाम करीब सवा पांच बजे वह अपने अनुयायियों के साथ मंदिर के बाहर बैठे थे। इसी दौरान तलवार, चाकू और लाठियां लेकर आए 10 युवकों ने उन पर हमला बोल दिया। बचने के लिए सभी लोग एक कमरे के अंदर भागे, लेकिन आरोपी कमरे में घुस आए और तलवारों व चाकुओं से हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर भाग निकले।
औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 पुलिस ने अनुयायी सुमित के बयान दर्ज कर राजा बल्हारी, कुलदीप, पारस, मोटा, राशिद बिल्ला, पवन, प्रदुम, बेदी, गोपी व अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सभी आरोपी कॉलोनी नंबर-4 के रहने वाले हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि आरोपी सुमित पर हमला करने आए थे, लेकिन हमले में पुजारी देवनाथ व अन्य को भी चोटें आईं। पुजारी देवनाथ ने कहा कि वह किसी भी हमलावर को नहीं जानते हैं। देवनाथ ने बताया कि उनका एक भाजपा नेता और उनके बेटे के साथ पुराना विवाद है, इसके अलावा उनका किसी के साथ कोई विवाद नहीं है।
बहन की शादी का कार्ड देने आया था, हमले में हुआ घायल
मंदिर का अनुयायी पिंकू पुजारी देवनाथ को अपनी बहन की शादी में आमंत्रित करने के लिए कार्ड देने आया था। घटना के बाद देवनाथ ने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को घटना की जानकारी दी। शिकायत मिलने पर पीसीआर गाड़ी मौके पर पहुंची और तीनों घायलों को मनीमाजरा अस्पताल पहुंचाया। सभी घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है और डॉक्टरों ने इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी है।
हाईकोर्ट ने एसएसपी को दिए थे मामले की जांच का आदेश
पुजारी ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए एक पूर्व पार्षद और उनके बेटे के खिलाफ शिकायत दी थी। पुजारी ने कहा था कि डेरे पर कब्जे को लेकर उन पर कई बार हमला हो चुका है। पुलिस की ओर से कोई मदद न मिलने पर उसे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट ने एसएसपी को आदेश दिया कि शिकायत पर कानून के अनुरूप कार्रवाई करें। मामले में दोबारा याचिका दाखिल हुई तो पता चला कि एसएसपी ने कुछ नहीं किया। एसएसपी ने डीएसपी की जांच रिपोर्ट को कोर्ट में सौंप दिया। यह सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना का मामला है।