‘छोड़ बातें खुदकुशी की, जिंदगी की बात कर, तीरगी में जो छिपी उस रोशनी की बात कर’। गजल की इन पंक्तियों के जरिए कवि कुमार विनोद ने पंजाबी साहित्य में अमिट छाप छोड़ने वाले जाने माने कवि शिव कुमार बटालवी की जिंदगी के फलसफे को बयां करने की कोशिश की।
मौका था चंडीगढ़ साहित्य अकादमी और यूटी कल्चरल डिपार्टमेंट की ओर से टैगोर थिएटर में आयोजित कवि सम्मेलन का। मुशायरे में ट्राइसिटी के अलावा दिल्ली, होशियारपुर, अंबाला, कुरुक्षेत्र के कई कवि और शायर पहुंचे। सभी ने अपनी नज्म, गजलों और शेयरों से टैगोर थिएटर की शाम में समां बांधा। इस मौके पर अकादमी के वाइस चैयरमैन सतीश कौशिश भी मौजूद रहे।
शिव कुमार बटालवी की याद में टैगोर थिएटर में आयोजित मुशायरे में दिल्ली के कवि जितेंद्र श्रीवास्तव ने एक लड़की की कहानी सुनाई। वहीं नफज अंबालवी ने अपनी पंक्तियों ‘हमारी राह से पत्थर उठा फेंक मत देना, लगी है ठोकरें तब जाके चलना सीख पाए हैं’ से श्रोताओं की तालियां बटोरीं।
वहीं, होशियारपुर के प्रोफेसर अजीत ने ‘कित्थे गइयां चिड़ियां, कित्थे मोइयां कुड़िया, कित्थे गइयां वोहड़ा वाली छां, छिल्ले-छाल्ले रूख खड़े परेशान पुत बड़े, निंबों चोढ़ी तुरी फिरे मां...’ से लोगों की वाहवाही बटोरी।
साहित्य में बटालवी के योगदान पर चर्चा
चंडीगढ़ साहित्य अकादमी और डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स की ओर से रविवार को यूटी गेस्ट हाउस में शिव कुमार बटालवी की याद में नेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने बटालवी के कला, साहित्य जगत के लिए दिए गए उनके योगदान पर चर्चा की। सेमिनार में दिल्ली यूनिवर्सिटी से डॉ. रवैल सिंह, जीएनडीयू अमृतसर से प्रो. हरभजन सिंह भाटिया, पंजाब यूनिवर्सिटी से प्रो. सुखदेव सिंह सिरसा, प्रो. सुरजीत सिंह, प्रो. योग राज समेत कई लोग मौजूद रहे। इन्होंने कवि बटालवी की रचनाओं और उनके पंजाबी साहित्य में दिए योगदान पर चर्चा की।