चंडीगढ़वासियों को यह खबर पढ़कर झटका लग सकता है। दरअसल, शहर में पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी पर ग्रहण लगता दिखाई पड़ रहा है। करीब एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी सेक्टर-43 में डेवलपमेंट के लिए प्रोजेक्ट को लैंड ट्रांसफर नहीं हो सकी है। इसके चलते स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ा झटका लग सकता है। यूटी प्रशासन ने स्मार्ट सिटी का 90 प्रतिशत बजट सेक्टर-43 की डेवलपमेंट पर ही लगाना था।
सूत्रों की मानें तो लैंड फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अंडर होने के चलते ट्रांसफर मुश्किल है। अंदेशा यह जताया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट कैंसिल भी हो सकता है। चंडीगढ़ का स्मार्ट सिटी के तहत मई 2016 में नाम आया था। उस समय शहर में स्मार्ट सिटी के तहत डेवलपमेंट के लिए कुल 6200 करोड़ रुपये का बजट मिला था। इस प्रोजेक्ट के लिए 5200 करोड़ रुपये सेक्टर 43 के डेवलपमेंट पर लगाए जाने हैं, लेकिन बार-बार फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से रिक्वेस्ट के बावजूद भी यह लैंड अभी तक ट्रांसफर नहीं हुई है।
प्रोजेक्ट के तहत ऐसे होना था काम
सेक्टर-43 में स्मार्ट सिटी के तहत बिजनेस इंवायरनमेंट किएट करने के लिए कन्वेंशन सेंटर, मिक्स इनकम हाउसिंग, सर्विस्ड अपार्टमेंट्स, होटल, फूड एंड बेवरेज, ऑफिसेज एंड रिटेल और म्यूजिम एंड आर्ट गैलरी आदि का निर्माण शामिल है। इसके अलावा यहां पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रमोट करना और पैदल चलने वालों के लिए उचित सुविधाएं प्रदान करना भी शामिल था।
क्या कहते हैं सीईओ
सीईओ स्मार्ट सिटी केके यादव ने बताया कि उन्होंने प्रशासन को लैंड ट्रांसफर के लिए लिखा हुआ है और जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नियमों के तहत फॉरेस्ट लैंड पर कुछ नहीं किया जा सकता, लेकिन जब तक प्रशासन का जवाब नहीं आता, तब तक इस संबंध में कुछ नहीं कह सकते। स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने चंडीगढ़ प्रशासन से इस प्रोजेक्ट के लिए 71 एकड़ भूमि हैंडओवर करने की मांग की थी।